देश में IIT और NIT में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को अब जेईई एडवांस के लिए सालभर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।..
JEE : देश में IIT और NIT में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को अब जेईई एडवांस के लिए सालभर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। केन्द्र सरकार की पहल पर अब यह परीक्षा साल में दो से तीन या चार बार भी आयोजित की जा सकती है। आईआईटी प्रवेश परीक्षा के तनाव में छात्रों के साथ होने वाली अप्रिय घटनाओं को देखते हुए केन्द्र सरकार जेईई एडवांस के पैटर्न में जल्द बड़ा बदलाव कर सकती है। केंद्र ने इस बदलाव के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर के निदेशक की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी को सौंपी है।
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर सरकार जेईई एडवांस के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत छात्रों के ऊपर से परीक्षा का दबाव कम करने के लिए ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (JEE) एडवांस्ड में परीक्षा के पैटर्न में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नए पैटर्न में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) के साथ एप्टीट्यूड के प्रश्न भी शामिल किये जा सकते हैं।
जेईई एडवांस के प्रारूप में बदलाव की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी को सौंपी गई है। ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) की देखरेख में आईआईटी विशेषज्ञ छह महीने में जेईई एडवांस रिफॉर्म का रोडमैप बनाकर देंगे। बाद में कमेटी की रिपोर्ट और विश्लेषण के आधार पर कार्ययोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगी।
केन्द्र सरकार की मंशा जेईई मेन की तर्ज जेईई एडवांस की परीक्षा भी पर साल में दो से तीन या चार बार आयोजित कराने की है। अभी यह परीक्षा साल में एक ही बार होती है। नई योजना में परीक्षा कई दिनों तक अलग-अलग स्लॉट में आयोजित करने की तैयारी है। छात्र अपनी सुविधानुसार परीक्षा में बैठ सकेंगे। इसके आधार पर उसमें से बेस्ट स्कोर वाले परिणाम को जेईई एडवांस मेरिट में जोड़ा जाएगा। जेईई एडवांस से दो महीने पहले फ्री मॉक टेस्ट भी लिया जाएगा। इसका मकसद, छात्रों को अपनी तैयारी जांचने, प्रैक्टिस का मौका और कमियों को दूर करने का अवसर मिलेगा।
केन्द्र की नई शिक्षा नीति में परीक्षाओं का तनावमुक्त किये जाने की सिफारिश की गई है। इसलिए छात्रों का तनाव दूर करने और कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए पैटर्न में बदलाव करने की योजना है।
जेईई एडवांस परीक्षा की नई योजना में एप्टीट्यूड को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। जेईई एडवांस परीक्षा में अभी पीसीएम के प्रश्न पूछे जाते हैं। नई योजना में एप्टीट्यूड को भी शामिल करने से प्रश्न-पत्र में पीसीएम के प्रश्नों की संख्या कम हो जाएगी। पीसीएम के लिए छात्र कोचिंग जाते हैं और अनावश्यक तनाव झेलते हैं। एप्टीट्यूड के प्रश्न पूछने का मकसद, छात्र की तार्किक क्षमता, गणितीय कौशल, और समस्या समाधान की क्षमता को परखना है। एक्सपर्ट का मानना है किएप्टीट्यूड टेस्ट से कोचिंग के असर को कम किया जा सकता है। इससे परीक्षा का कड़ा स्तर थोड़ा आसान होगा। नए पैटर्न में विषयों के बजाय क्रिटिकल थिंकिंग, स्किल को उभारना है।
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