देश में बढ़ते प्रदूषण की समस्या के बीच स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है।
नई दिल्ली। देश में बढ़ते प्रदूषण की समस्या के बीच स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। सभी वाहन निर्माता पेट्रोल और डीजल से हटकर रोजाना नये इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल के वाहन लॉन्च कर रहे हैं। टोयोटा और मारूति जैसी कंपनियां स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों पर फोकस कर रही हैं तो टाटा और महिन्द्रा का जोर इलेक्ट्रिक वाहनों पर है। इसे देखते हुए आटो कंपनियां केन्द्र व राज्य सरकारों से इन गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन में छूट की मांग कर रही है।
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की सिफारिश
इस बीच संसद की स्थाई समिति ने देश में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को प्रोत्साहित किये जाने की सिफारिश की है। संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं हाइब्रिड कारों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर केंद्रित होनी चाहिए। समिति ने देश में पेट्रोल पंपों पर बिक रहे एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। स्थायी समिति की ये रिपोर्ट आने वाले दिनों में वाहन उद्योग के भविष्य के लिए नीति निर्धारक हो सकती है।
पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन पर निर्भर करते हैं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल/डीज़ल) पर निर्भर करते हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरह 'शून्य-उत्सर्जन' नहीं होते। ये सच है कि वे पारंपरिक कारों की तुलना में कम प्रदूषण करते हैं क्योंकि वे इलेक्ट्रिक मोटर का भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन शून्य-उत्सर्जन वाहनों के विपरीत उनसे निकलने वाले धुएं से प्रदूषण फैलता है। खासकर शहर में कम गति पर, जिससे ईंधन की बचत होती है और CO2 उत्सर्जन घटता है। लेकिन वे अभी भी टेलपाइप से हानिकारक धुएं (कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कण पदार्थ) छोड़ते हैं, जो वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं और पर्यावरणीय चिंता का कारण हैं। इसे ध्यान में रखते हुए भारत में संसदीय समिति ने हाइब्रिड पर EV प्रोत्साहन पर जोर दिया है।
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर वाहन निर्माताओं के बीच मतभेद
मालूम हो कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर वाहन उद्योग भी बंटा हुआ है। टोयोटा और मारुति सुजूकी जैसी कंपनियां स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों के समर्थन की वकालत कर रही हैं। वहीं टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसी घरेलू ईवी कंपनियां सिर्फ ईवी के लिए प्रोत्साहन पर जोर दे रही हैं। ऐसे में वाहन निर्माताओं के बीच स्पष्ट मतभेद के बीच संसद की स्थायी समिति की यह सिफारिश आने वाले दिनों में वाहन उद्योग की दिशा तय कर सकते हैं।
ईंधन एथेनॉल के अधिक मिश्रण से पुराने वाहनों के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें
भाजपा के राज्यसभा सांसद भुवनेश्वर कलिता की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि एथेनॉल के अधिक मिश्रण से पुराने वाहनों के लिए चिंताएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि उनमें ऐसे ईंधन को संभालने के लिए उन्नत प्रणालियां नहीं होती हैं और इससे उन्हें यांत्रिक क्षति और अधिक उत्सर्जन का सामना करना पड़ सकता है।
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