किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के पूह गांव के चार वर्षीय बच्चे को औपचारिक तौर पर बौध धर्म के नौवें युलगियाल टुल्कू की पदवी दी गई है।
किन्नौर में चार वर्षीय बच्चे को 9वें युलगियाल तुल्कु रिनपोछे के रूप में दी गई मान्यता |
Himachal Pradesh : किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के पूह गांव के चार वर्षीय बच्चे को औपचारिक तौर पर बौध धर्म के नौवें युलगियाल टुल्कू की पदवी दी गई है। उनके मंडन संस्कार में क्षेत्र के हजारों की संख्या में अनुयायी पहुंचे थे। कुल्लू जिले में 'शादा वाई बुद्धिस्ट गोंपा' पहुंचने पर उन्हें नई पदवी मिलेगी।
गोंपा में ही भीक्षु (मांक) का परंपरागत मंडन कराया जाता है। इस मुंडन के साथ ही उनकी जीवनभर के लिए बौद्ध भीक्षु जीवन की शुरुआत हो जाती है। नए रिन्पोछे से आशीर्वाद पाने के लिए किन्नौर और आसपास के जिलों के बड़ी संख्या में लोग जुटे थे।
देचेन चोई खोर महाविहार के आचार्य रोशन लाल ने बताया कि प्रथम आध्यात्मिक गुरु, युगेल रिनपोछे ने 1730 में लद्दाख के शाही परिवार में पहला जन्म लिया और उसके बाद उन्हें तिब्बत के बौद्ध महाविहार में शिक्षा-दीक्षा मिली। इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार किया और लोगों को शांतिपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा दी।
रामेश कुमार ने कहा कि धार्मिक गुरु ने लगातार अवतार लिए और अपने आठवें जन्म में वे किन्नौर के गोम्पा में रहे। अब उन्होंने अपना नौवाँ जन्म लिया है और देचेन चोई खोर महाविहार में संस्कारित किए गए हैं।
रोशन लाल ने बताया कि धर्मगुरु ने अपने प्रथम जन्म में किन्नौर, लाहौल, स्पीति, तिब्बत और लद्दाख के लेह में बौद्ध धर्म का अध्ययन किया, वहीं लोगों में इसका प्रचार किया।
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/state/explosives-were-kept-in-two-underground-depots-in-balaghat/99491