सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उसने वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के दौरान इस्तेमाल हो रहे 'फॉर्म 6' के किसी बदले वर्शन को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट रिकॉर्ड की जांच कर देखेगी कि बदलाव किसने किए।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने वोटर लिस्ट में नए वोटर्स को जोड़ने के लिए चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे 'फॉर्म 6' के किसी भी बदले हुए वर्शन को मंजूरी नहीं दी है।
कोर्ट रिकॉर्ड से खुलेगा बदलाव करने वाले का राज
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कोर्ट रिकॉर्ड की जांच करके यह पता लगाएगी कि बदलाव किसने किए हैं। यह बात तब कही गई जब चुनाव आयोग ने पिछले हफ़्ते दावा किया था कि ऑनलाइन 'फॉर्म 6' के साथ जोड़े गए नए डिक्लेरेशन (घोषणा-पत्र) को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी।
चुनाव आयोग के दावे पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
CJI ने कहा, "हमने 'फॉर्म 6' के किसी भी बदले हुए वर्शन को मंज़ूरी नहीं दी है। यह बात साफ होनी चाहिए। जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया है।" यह स्पष्टीकरण वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उन्होंने SIR प्रक्रिया से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
फॉर्म 6 में नए डिक्लेरेशन को लेकर है विवाद
यह विवाद 'फॉर्म 6' में एक नए डिक्लेरेशन से जुड़ा है, जिसमें आवेदकों को यह बताना होता है कि क्या वे या उनके माता-पिता पिछले SIR में मैप किए गए थे या नहीं। यह शर्त पहले के 'फॉर्म 6' का हिस्सा नहीं थी, जिसका इस्तेमाल दूसरे राज्यों में SIR प्रक्रियाओं के दौरान किया गया था। याचिकाकर्ता ने इन कथित फैसलों की स्वतंत्र न्यायिक जांच और 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 32 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं और 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर चिंता जताई। इस फॉर्म का इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए आवेदन करने में करते हैं। बेंच ने नोटिस जारी किया और याचिका को चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाले एक समान मामले के साथ जोड़ दिया।
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