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शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट जाने का दिया निर्देश

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की जनहित याचिका की खारिज

बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी कथित पुलिस एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा है।

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की जनहित याचिका की खारिज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय छात्र और स्थानीय कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित पटना हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से जांच की थी मांग

यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर की थी। याचिका में भरत भूषण तिवारी की कथित हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस गैर-न्यायिक हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी।

क्या है पूरा मामला?

भोजपुर जिले के बिलौती गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने खासकर जवानिया गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकारी पुनर्वास की कमी का मुद्दा उठाया था। प्रशासनिक उदासीनता से निराश होकर तिवारी ने फेसबुक पर कुछ वीडियो पोस्ट किए थे, जिसमें वे अवैध हथियार लहराते हुए स्थानीय अधिकारियों को 'मुठभेड़' की चुनौती दे रहे थे। 16 जून को भोजपुर पुलिस ने तिवारी को 'मानसिक रूप से अस्थिर' बताया और कहा कि वे उन्हें निहत्था कर इलाज के लिए मानसिक अस्पताल भेजने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अगले दिन यानी 17 जून को पुलिस और तिवारी के बीच गतिरोध हुआ, जिसमें गोली लगने से तिवारी की मौत हो गई।

पुलिस का दावा बनाम फेसबुक लाइव वीडियो

भोजपुर पुलिस का दावा है कि तिवारी ने पुलिस टीम पर अवैध पिस्तौल से 8 से 10 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में एसटीएफ कर्मियों को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। दूसरी तरफ, घटना से ठीक पहले के एक फेसबुक लाइव वीडियो में तिवारी एक खुले मैदान में खड़े दिख रहे हैं और उन्होंने आत्मसमर्पण के संकेत के रूप में अपनी पिस्तौल पुलिस की तरफ फेंक दी थी। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने एक निहत्थे व्यक्ति को गोली मारी है।

बिहार में राजनीतिक संकट, चार पुलिसकर्मी निलंबित

इस घटना के बाद बिहार में भारी जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव देखने को मिल रहा है। स्थिति को संभालते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व में स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, जांच पूरी होने तक स्थानीय थाना प्रभारी समेत चार पुलिस अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। भरत भूषण के पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा कि ''पूरी दुनिया देख रही थी कि मेरे बेटे की हत्या कैसे हुई। अगर मुझे न्याय नहीं मिला तो फिर क्या मिलेगा? प्रशासन, जज और सभी लोग उनकी हत्या होते हुए देख रहे थे। यहां छिपाने जैसा कुछ नहीं है।''

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