सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों के शोर की तय सीमा में कुछ संभावित ढील पर CPCB से विचार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से यह जांचने को कहा कि आगामी दिवाली के दौरान पटाखों से जुड़ी पाबंदियों में कुछ हद तक ढील दी जा सकती है या नहीं। खास तौर पर पटाखों के लिए निर्धारित शोर की सीमा को लेकर संभावना तलाशने को कहा गया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच दिल्ली और उत्तरी राज्यों में पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़ा है। कोर्ट ने CPCB को दिवाली से पहले इस मुद्दे पर विचार करने को कहा है।
कोर्ट ने कहा- दिवाली से ठीक पहले जल्दबाजी नहीं चाहते
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने CPCB की ओर से पेश वकील से पटाखों के मामले में कुछ अपवाद या राहत की संभावना देखने को कहा। बेंच ने स्पष्ट किया कि वह दिवाली से ठीक पहले इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहती। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि संबंधित पक्ष पहले से स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में काम करें। इसी उद्देश्य से CPCB से शोर की निर्धारित सीमाओं में संभावित ढील की जांच करने को कहा गया है। मामले में पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों और संभावित बदलावों पर विचार जारी है।
22 जुलाई की सुनवाई में भी CPCB से निर्देश लेने को कहा गया था
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 22 जुलाई को हुई सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से CPCB से निर्देश लेने को कहा था। कोर्ट यह जानना चाहता था कि क्या कुछ विशेष श्रेणी के पटाखों को शोर से जुड़ी पाबंदियों में संभावित ढील के साथ अनुमति दी जा सकती है। बुधवार को जब मामला फिर सुनवाई के लिए आया, तो केंद्र सरकार और CPCB की ओर से पेश भाटी ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया। बेंच ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया। हालांकि, कोर्ट ने CPCB को संभावित राहत के मुद्दे पर विचार करने की बात दोहराई।
पटाखा विक्रेताओं ने लाइसेंस बहाल करने की मांग उठाई
सुनवाई के दौरान कुछ पटाखा विक्रेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने मौजूदा स्थिति को लेकर स्पष्टता की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। वकील ने अदालत से कम से कम लाइसेंस बहाल करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि अगर कोर्ट आगे चलकर पटाखों के निर्माण की अनुमति देता है तो विक्रेताओं के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए। इस मुद्दे को भी सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखा गया।
2015 से चल रहा है पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2015 में शुरू हुई उस कानूनी कार्यवाही से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। अदालत ने विशेष रूप से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में खराब होती वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखा था। समय के साथ कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। पहले दिल्ली में पटाखों के इस्तेमाल पर व्यापक रोक लगाई गई थी। बाद में अदालत ने 2025 में दिवाली के आसपास सीमित अवधि के लिए दिल्ली-NCR में स्वीकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री और उन्हें जलाने की अनुमति दी थी।
मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई के बाद मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान CPCB से पटाखों की शोर सीमा में संभावित ढील के मुद्दे पर विचार करने की अपेक्षा की गई है। अदालत के सामने अब संबंधित पक्षों की स्थिति और CPCB से मिलने वाली जानकारी होगी। दिवाली से पहले इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल पटाखों से जुड़े मौजूदा नियमों में कोई अंतिम बदलाव नहीं किया गया है। अगली सुनवाई में अदालत इस विषय पर आगे विचार करेगी। (Source: ANI)
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