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टैंक खत्म नहीं, आधुनिक होंगे: राजनाथ सिंह

आधुनिक युद्ध में टैंकों की भूमिका अहम, राजनाथ ने दिया आधुनिकीकरण पर जोर

जबलपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और AI जैसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद टैंकों की भूमिका खत्म नहीं हुई है।

आधुनिक युद्ध में टैंकों की भूमिका अहम राजनाथ ने दिया आधुनिकीकरण पर जोर

टैंक खत्म नहीं, आधुनिक होंगे: राजनाथ सिंह (ANI Photo) |

जबलपुर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इस बात पर जोर दिया कि युद्ध के बदलते युग में भी टैंकों का महत्व कम नहीं हुआ है। जरूरत सिर्फ उन्हें आधुनिक क्षमताओं से लैस करने की है। उन्होंने यह बात यहां टी-72 और टी-90 टैंकों के नवीनीकरण केंद्र के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए कही।

आधुनिक युद्ध में अब भी अहम हैं टैंक

राजनाथ सिंह ने कहा, आज युद्ध का स्वरूप निश्चित रूप से बदल गया है। ड्रोन, सटीक निर्देशित हथियार, मिसाइलें, उपग्रह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर युद्ध मौजूद हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंकों का महत्व समाप्त हो गया है। आधुनिक युद्ध के लिए सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि संयुक्त क्षमताओं की आवश्यकता है। 

टैंकों को खत्म करने की नहीं, उन्हें आधुनिक बनाने की है जरूरत

आज टैंकों को खत्म करने की नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक बनाने की जरूरत है। उन्हें आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर सेंसर और क्षमताओं से लैस करने की है। हर प्रणाली की अपनी ताकत होती है। उदाहरण के लिए टैंक की सबसे बड़ी ताकत उसकी गतिशीलता, सुरक्षा और मारक क्षमता का संयोजन है। कठिन इलाकों में भी यह सैनिकों को सुरक्षित गतिशीलता प्रदान करता है। साथ ही टैंक जमीनी अभियानों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

टैंक की भूमिका नहीं हुई है समाप्त: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, टैंक की भूमिका समाप्त नहीं हुई है, बल्कि इसकी भूमिका विकसित हो रही है। यही हमारी रक्षा नीति का मार्गदर्शन भी करता है। हमारा दृष्टिकोण किसी एक प्लेटफॉर्म को दूसरे के विकल्प के रूप में देखने का नहीं है। हमें आधुनिक टैंकों के साथ-साथ ड्रोन, मिसाइलें, तोपखाना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ऊर्जा हथियार भी चाहिए।

टैंक और ड्रोन के बेहतर तालमेल से बनेगी एकीकृत युद्ध प्रणाली

उन्होंने कहा, हमें यह तय करने की आवश्यकता नहीं है कि हमें टैंक चाहिए या ड्रोन। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे सैनिकों के पास टैंक और ड्रोन दोनों हों, साथ ही उनके बीच बेहतर समन्वय भी हो। ये मिलकर एक एकीकृत युद्ध प्रणाली का निर्माण करते हैं। इस दृष्टिकोण का एक व्यावहारिक उदाहरण हमारी सेना द्वारा एकीकृत युद्ध समूहों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 

(इनपुट: ANI)

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