Delhi Car Blast : वीडियो में उमर ने कहा है कि जिसे आत्मघाती बम विस्फोट कहा जाता है, वह अवधारणा बहुत ही गलतफहमी में से एक है. यह एक शहादत अभियान है. जिसे इस्लाम में जाना जाता है.
Delhi Car Blast : वीडियो में उमर ने कहा है कि जिसे आत्मघाती बम विस्फोट कहा जाता है, वह अवधारणा बहुत ही गलतफहमी में से एक है. यह एक शहादत अभियान है. जिसे इस्लाम में जाना जाता है. उमर ने धमाके से पहले वीडियो बनाया था. वह इस वीडियो में टूटी – फूटी अंग्रेजी में बात कर रहा है. इस वीडियो में आगे उमर ने कहा कि इस अवधारणा के खिलाफ कई तर्क दिए गए हैं और इसमें विरोधाभास भी है.
आगे उसने कहा कि "शहादत" अभियान होता है, जिसमें व्यक्ति यह मान लेता है कि उसकी मौत किसी खास जगह और समय पर होगी तो वह एक खतरनाक मानसिक अवस्था में पहुंच जाता है. वह मानने लगता है कि मौत ही उसका अंतिम लक्ष्य है. वास्तविकता यह है कि किसी भी लोकतांत्रिक और मानवीय व्यवस्था में ऐसी सोच या ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह जीवन, समाज और कानून तीनों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.
पूछताछ में बड़े खुलासे
पुलिस ने आरोपी डॉक्टरों से पूछताछ कर रही है. ऐसे में कई खुलासे सामने आ रहे हैं. आरोपी डॉक्टरों के मोबाइल फोन से कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं. उनके मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच हुई है. जिसमें पता चला कि सिग्नल ऐप का यूज कर रहे थे. सिग्नल ऐप पर एक ग्रुप में सभी जुड़े हुए थे. डॉक्टर मुजफ्फर इस ग्रुप का एडमिन था. इस ग्रुप में डॉक्टर उमर, डॉक्टर मुजम्मिल, आदिल और डॉक्टर शाहीन शामिल था. जांच अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टर उमर की अहम भूमिका थी.
डॉक्टर उमर या उसके साथी कोई कैमिकल खरीदते थे तो इस ग्रुप में उसकी जानकारी विस्तृत रूप से दी जाती थी. डिजिटल फुट प्रिंट्स लिए गए तो यह पता लगा कि अमोनियम नाइट्रेट, TATP, सल्फर डाईऑक्साइड समेत अधिकांश विस्फोटक केमिकल जैसे सामान उमर जुटा रहा था. मुजम्मिल को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह इस सामान को सुरक्षित रख दे. मुजम्मिल के किराए के घर में केमिकल का स्टॉक रखा जाता था तो वह तस्वीरें ग्रुप में साझा किया करता था.
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