इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अवैध धर्मांतरण के मामले में झूठा फंसाये गये एक व्यक्ति को रिहा करने के साथ ही यूपी पुलिस पर 75 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।
हाईकोर्ट ने अवैध धर्मातरण कानून में झूठा फंसाये गये युवक को रिहा करने का दिया आदेश
फर्जी गिरफ्तारी पर पुलिस को फटकार, यूपी सरकार पर लगाया हर्जाना
लखनऊ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अवैध धर्मांतरण के मामले में झूठा फंसाये गये एक व्यक्ति को रिहा करने के साथ ही यूपी पुलिस पर 75 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने अवैध धर्मातरण निरोधक कानून के गलत इस्तेमाल पर यूपी पुलिस को फटकार लगाई है।
"उप्र अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून" के तहत एक युवक को झूठा फंसाये जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यूपी पुलिस के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की इस कारवाई पर कड़ी फटकार लगाते हुए डेढ़ माह से जेल में बंद फर्जी फंसाये गये युवक को रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार पर 75 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने हर्जाने के 50 हजार रुपये बंदी को देने और 25 हजार कोर्ट की कानूनी सहायता सेवाओं में जमा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की एफआईआर रद्द करके डेढ़ माह से जेल में बंद व्यक्ति को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने यह आदेश उमेद उर्फ उबैद खां व अन्य लोगों की याचिका पर दिया। याचिका में बहराइच के मटेरा थाने में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने समेत याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था। याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि बहराइच निवासी पंकज कुमार ने 13 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज करवाकर कहा, उसकी पत्नी नकदी और जेवरों के साथ घर से गायब हो गई। आरोप लगाया कि याचियों समेत पांच लोग उसकी पत्नी को बहला फुसलाकर भगा ले गए हैं। पुलिस ने कथित आरोपियों के खिलाफ अपहरण समेत उप्र अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया।
इसके बाद पुलिस ने इस मामले में उबैद खां को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इसी बीच वादी की पत्नी वापस आ गई और पुलिस को बयान दिया कि वह पति के दुर्व्यवहार की वजह से खुद मर्जी से भाग गई थी। कहा कि इसके बावजूद पति के दबाव में अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिवक्ता ने कहा कि पत्नी के इस बयान के बावजूद याची उबैद को रिहा नहीं किया गया।
हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि वादी की पत्नी का बयान पूरी तरह से एफआईआर को झुठलाने वाला है। इसके बावजूद पुलिस अफसरों ने उबैद की रिहाई का कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया और वह डेढ़ माह से जेल में है। इस दयनीय हालत पर कोर्ट को राज्य पर 75 हजार हर्जाना लगाना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका एफआईआर के आधार पर अच्छे काम के नंबर बढ़ाने (टू स्कोर ब्राउनी पॉइंट्स) के लिए राज्य प्राधिकारियों द्वारा एक दूसरे की ओर डोलने और गिरने का खुला उदाहरण है।
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