मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों के बीच सोनम वांगचुक ने नैतिक समर्थन दिया है। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में मतभेद के दावों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
नई दिल्ली। नई दिल्ली में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल खत्म करने के दो महीने बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर आवाज उठा रहे सभी संगठनों को अपना नैतिक समर्थन देने का ऐलान किया है।
वांगचुक ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनके लिए हर एक जमीनी आंदोलन में व्यक्तिगत तौर पर शामिल होना मुमकिन नहीं है। इसके बावजूद वह चाहते हैं कि चुनावी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरा देश एकजुट हो।
अपने बयान में वांगचुक ने कहा, "मैं ऐसे मुद्दे उठाने वाले सभी संगठनों और नेताओं को हमेशा अपना नैतिक समर्थन देता हूं। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और जवाबदेही तय करना पूरी तरह से वाजिब मांग है। हालांकि मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से हर आंदोलन में शामिल होना संभव नहीं है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक स्वच्छ और पारदर्शी लोकतंत्र के निर्माण के लिए इस जवाबदेही की मांग में पूरा देश शामिल होगा।"
सीजेपी की मुख्य मांगें
वर्तमान में सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अभियान चला रही है। संस्था ने मांग की है कि आगामी सभी चुनावों पर तुरंत रोक लगाई जाए और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को भी फिलहाल स्थगित किया जाए।
संस्था का विरोध हालिया वैधानिक ढांचे पर भी केंद्रित है। संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 को वापस लेने की मांग पर लगातार जोर दे रहा है।
आयोग में मतभेद के आरोप
यह पूरा राजनीतिक विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद गहराया, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े अहम नीतिगत फैसलों पर आयोग के तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
संबंधित रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उनकी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों तथा जारी किए गए आदेशों पर कई बार औपचारिक आपत्ति जताई थी। इस खुलासे के बाद निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे।
चुनाव आयोग की आधिकारिक सफाई
विवाद बढ़ने के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शनिवार को अपनी आधिकारिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के कार्यक्रम से जुड़े सभी फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे।
आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र पर भी स्थिति साफ की। निर्वाचन निकाय ने बताया कि वह पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था, न कि आयोग के किसी नीतिगत अथवा प्रशासनिक मामले से।
प्रेस नोट के मुताबिक 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि शेष 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इसे 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मति से ही अधिसूचित किया गया था।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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