सिकंदराबाद से दानापुर लौट रहे बिहार के युवक धर्मेंद्र महतो की ट्रेन में तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।
बैतूल (मध्य प्रदेश)। बैतूल में इंसानियत की ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने पराए शहर में अपनों की कमी महसूस नहीं होने दी। सिकंदराबाद से दानापुर जा रही ट्रेन में अचानक तबीयत बिगड़ने से बिहार निवासी युवक की मौत हो गई। आर्थिक तंगी के कारण परिजन शव को बिहार ले जाने में असमर्थ थे। ऐसे मुश्किल वक्त में राष्ट्रीय हिंदू सेना के कार्यकर्ता आगे आए और पारिवारिक सदस्य की तरह जिम्मेदारी निभाते हुए माँ माचना मोक्ष धाम में पूरे धार्मिक विधि-विधान से धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार कराया।
मृतक का परिचय
मृतक की पहचान धर्मेंद्र महतो (27 वर्ष), पिता शिवनाथ महतो, निवासी ग्राम रेवतीत, थाना बैकुंठपुर, जिला गोपालगंज, बिहार के रूप में हुई है। धर्मेंद्र सिकंदराबाद के गड़ी मसामा में पेंटिंग का काम करता था और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में वृद्ध माता इलायची देवी और भाई गरेन्द्र महतो हैं।
अचानक बिगड़ी तबीयत
धर्मेंद्र अपने भाई महेंद्र महतो और अन्य दोस्तों के साथ सिकंदराबाद एक्सप्रेस से सिकंदराबाद से दानापुर अपने घर लौट रहा था। यात्रा के दौरान कल रात करीब 8 बजे चलती ट्रेन में उसकी तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। हालत बिगड़ने पर साथ मौजूद लोगों ने उसे तत्काल बैतूल रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारा और उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
आर्थिक तंगी और मदद
युवक की अचानक मौत से उसके भाई और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बैतूल से शव को बिहार ले जाने का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं था। बेबस परिजनों ने स्थानीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई। जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय हिंदू सेना के सदस्य तत्काल मदद के लिए आगे आए और परिजनों को ढांढस बंधाते हुए अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
अंतिम संस्कार
गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय हिंदू सेना के सदस्यों ने धर्मेंद्र को अपना परिजन मानकर बैतूल के माँ माचना मोक्ष धाम में पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान राष्ट्रीय हिंदू सेना मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय, सुनील नागोरे, दिलीप उच्चैसरे, विदित मालवी, सुमित कुमार पशवार मौजूद रहे।
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