सुरक्षा एजेंसियों के खुलासे के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकी शहजाद भट्टी का नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तकनीक-प्रेमी युवाओं को आसान पैसे का लालच देकर 'डिजिटल फुट सोल्जर्स' बना रहा है।
नई दिल्ली: सुरक्षा एजेंसियों की लगातार गिरफ्तारियों और कड़ी कार्रवाई के बावजूद पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी का भर्ती नेटवर्क भारत में अब भी सक्रिय है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस नेटवर्क के लिए नए रंगरूटों की भर्ती का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है।
ऑनलाइन कट्टरपंथ के खिलाफ जागरूक कर रही पुलिस
सूत्रों के अनुसार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पिछले कुछ महीनों में इस सिंडिकेट से जुड़े कई संदिग्धों को दबोचा है। कई अन्य लोगों की पहचान कर उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए पुलिस अब कमजोर युवाओं के परिवारों से संपर्क कर उन्हें ऑनलाइन कट्टरपंथ के खिलाफ जागरूक और सचेत कर रही है।
'फुट सोल्जर्स' की भर्ती बड़ी चिंता
जांचकर्ताओं का कहना है कि अब चुनौती सिर्फ किसी एक मॉड्यूल को खत्म करने की नहीं है, बल्कि युवाओं की लगातार हो रही भर्ती को रोकना है। इन युवाओं को अधिकारी 'फुट सोल्जर्स' कह रहे हैं। पारंपरिक आतंकी भर्ती के विपरीत इन्हें शुरुआत में हथियार रखने या हिंसक कृत्यों में भाग लेने के लिए नहीं कहा जाता है। इसके बजाय, इनसे संवेदनशील स्थानों की रेकी करना, तस्वीरें और वीडियो जुटाना, फर्जी सिम कार्ड की व्यवस्था करना, डिजिटल संचार को सुगम बनाना, विदेशों में बैठे आकाओं को रसद और लॉजिस्टिक्स संबंधी जानकारी देने का काम कराया जाता है।
कई जिलों के युवाओं पर नजर, तकनीक-प्रेमी निशाने पर
हालिया जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जाल में फंसे अधिकतर युवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मथुरा जिलों से ताल्लुक रखते हैं। यह नेटवर्क विशेष रूप से तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं, मोबाइल रिपेयरिंग तकनीशियनों, सीसीटीवी ऑपरेटरों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को निशाना बना रहा है।
पैसे का लालच देकर की जा रही भर्ती
सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए युवाओं को पैसे का लालच दिया जाता है। देश की सुरक्षा पर इसके गंभीर असर को समझे बिना युवा धीरे-धीरे दलदल में फंसते चले जाते हैं।
डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क तोड़ना बड़ी चुनौती
सुरक्षा एजेंसियां इस बात से हैरान हैं कि हर गिरफ्तारी के बाद यह नेटवर्क नए सिरे से भर्तियां कर लेता है। इसका ढांचा डिसेंट्रलाइज्ड है, जिससे भारत के बाहर बैठे हैंडलर्स मुख्य आरोपियों के पकड़े जाने के बावजूद नए संपर्क बनाने में कामयाब हो रहे हैं।
'भर्ती चेन' तोड़ना एजेंसियों की नयी योजना
अब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तारियों से आगे बढ़कर स्थानीय समुदायों और परिवारों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि माता-पिता की सतर्कता ही युवाओं को इस जाल में फंसने से रोक सकती है। अब मुख्य ध्यान इस पूरी भर्ती शृंखला को ध्वस्त करने पर है, ताकि आम भारतीय युवाओं को 'डिजिटल सिपाही' बनने से रोका जा सके।