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युमनाम खेमचंद सिंह ने संभाली कमान

मणिपुर को मिला 13वां मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति शासन के बाद खेमचंद सिंह ने ली शपथ

मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद आज बुधवार को वरिष्ठ भाजपा नेता व सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने लोक भवन में 13वें मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली।

मणिपुर को मिला 13वां मुख्यमंत्री राष्ट्रपति शासन के बाद खेमचंद सिंह ने ली शपथ

Yumnam Khemchand Singh Sworn in as Manipur Chief Minister |

इंफाल (मणिपुर)। मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद आज बुधवार को वरिष्ठ भाजपा नेता व सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने लोक भवन में 13वें मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। वहीं, कुकी समुदाय से आने वाली कांग्पोक्पी की विधायक नेमचा किपगेन और नागा समुदाय से आने वाली माओ से विधायक लोसी डिखो को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

मणिपुर से हटाया गया राष्ट्रपति शासन

मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुए जातीय संघर्ष के बाद हो रही आलोचनाओं के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने  फरवरी 2025 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से लेकर अब तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया।

पेशे से इंजीनियर हैं मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह

बता दें कि मैतेई समुदाय से आने वाले 62 वर्षीय खेमचंद सिंह पेशे से इंजीनियर हैं। वे 2017-2022 तक मणिपुर विधानसभा स्पीकर रह चुके हैं और एन. बीरेन सिंह सरकार में नगर प्रशासन मंत्री रह चुके हैं। सिंह साल 2022 में भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। इन्हें मैतेई समुदाय में एक मध्यमार्गी नेता माना जाता है जो हाल के महीनों में शांति प्रयासों में काफी सक्रिय भूमिका निभाई थी। इन्होंने मई 2023 की हिंसा के बाद कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंपों का दौरा कर कठोर मैतेई धड़े से अलग अपनी संतुलित और समावेशी राजनीति करने वाले नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।

दोनों समुदाय के बीच लंबे समय से रहा है टकराव

गौरतलब है कि मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और अल्पसंख्यक कुकी-जोमी जनजातियों के बीच आर्थिक लाभ, नौकरियों में आरक्षण और भूमि अधिकारों से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय से टकराव रहा है। इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी जबकि करीब 60 हजार लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए थे।

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