बिहार के 16 जीआई टैग प्राप्त उत्पाद राज्य की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक कला, कृषि और शिल्प कौशल की पहचान बनकर वैश्विक मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।
पटना,(बिहार)। किसी भी प्रदेश की पहचान उसकी संस्कृति, खान-पान, कृषि परंपराओं और लोक कलाओं से होती है। बिहार इस मामले में सदियों पुरानी समृद्ध विरासत का धनी रहा है। राज्य की पारंपरिक कला, स्वाद और शिल्प अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों को मिला GI Tag
हाल ही में भारत सरकार की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री (GI) द्वारा बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों बावन बूटी साड़ी, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और पिड़िया पेंटिंग को जीआई टैग प्रदान किया गया। इसके साथ ही बिहार के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता के आधार पर कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इससे न केवल इन उत्पादों को देश और विदेश में पहचान मिलती है, बल्कि किसानों, बुनकरों और कारीगरों के लिए रोजगार और बाजार के नए अवसर भी खुलते हैं।
बिहार के गौरवशाली कृषि उत्पाद
बिहार के कृषि उत्पाद अपनी खास मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। इस श्रेणी में छह उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है।
शाही लीची (मुजफ्फरपुर)
मुजफ्फरपुर की शाही लीची अपनी रसीली बनावट, गहरे लाल रंग और छोटे बीज के लिए प्रसिद्ध है। गर्मियों में इसकी सुगंध देशभर के बाजारों में आकर्षण का केंद्र रहती है।
मिथिला मखाना (मिथिलांचल)
मिथिला क्षेत्र, खासकर दरभंगा और मधुबनी, मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। पौष्टिक गुणों से भरपूर यह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ आज दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है।
जरदालू आम (भागलपुर)
भागलपुर का जरदालू आम अपने सुनहरे रंग, मीठे स्वाद और बिना रेशे वाले गूदे के लिए जाना जाता है। इसकी विशेष खुशबू इसे अन्य आमों से अलग पहचान देती है।
कतरनी चावल (भागलपुर और बांका)
छोटे आकार के दानों वाला कतरनी चावल पकने के बाद अपनी मनमोहक खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। इससे बना चूड़ा बिहार की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा है।
मर्चा धान (पश्चिमी चंपारण)
काली मिर्च जैसे दिखने वाले छोटे दानों वाला मर्चा धान अपनी अनोखी सुगंध और स्वाद के कारण खास पहचान रखता है।
मगही पान (मगध क्षेत्र)
गया, नवादा और औरंगाबाद क्षेत्र में उगाया जाने वाला मगही पान अपनी मुलायम पत्तियों और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसका संबंध मगध की ऐतिहासिक परंपराओं से भी जुड़ा है।
बिहार की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प
बिहार की लोक कलाएं और हस्तशिल्प सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हैं। इस श्रेणी में आठ उत्पादों को जीआई टैग मिला है।
मधुबनी पेंटिंग (मिथिला)
मधुबनी पेंटिंग बिहार की सबसे प्रसिद्ध लोक कलाओं में से एक है और राज्य का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद भी है। इसमें प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों से देवी-देवताओं, प्रकृति और सामाजिक जीवन के चित्र बनाए जाते हैं।
बावन बूटी साड़ी (नालंदा)
बावन बूटी साड़ी में हथकरघे पर 52 विशेष बूटों की डिजाइन बुनी जाती है। इसमें बौद्ध संस्कृति और प्रकृति से जुड़े प्रतीकों की झलक देखने को मिलती है। इसका प्रमुख केंद्र नालंदा का बसवान बीघा क्षेत्र है।
पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट (गया)
गया के पत्थरकट्टी क्षेत्र के कलाकार काले ग्रेनाइट पत्थरों को तराशकर भगवान बुद्ध और अन्य देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां बनाते हैं। यह प्राचीन नक्काशी कला अब वैश्विक पहचान हासिल कर रही है।
पिड़िया पेंटिंग (भोजपुर)
यह पारंपरिक लोक कला मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा त्योहारों के अवसर पर बनाई जाती है। इसमें मिट्टी, गोबर और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं।
सिक्की घास उत्पाद (मिथिलांचल)
सुनहरी सिक्की घास से ग्रामीण महिलाएं सुंदर टोकरियां, खिलौने और सजावटी वस्तुएं तैयार करती हैं। यह कला ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सुजनी कढ़ाई (मुजफ्फरपुर)
पुराने कपड़ों को जोड़कर उन पर रंगीन धागों से की जाने वाली सुजनी कढ़ाई में सामाजिक संदेश और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई देती है।
एप्लिक (खटवा) पैचवर्क (पटना)
इस कला में कपड़ों के रंगीन टुकड़ों को जोड़कर आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसका उपयोग साड़ियों, सजावटी वस्तुओं और अन्य कपड़ा उत्पादों में किया जाता है।
मंजूषा कला (भागलपुर)
अंग क्षेत्र की यह लोक कला बिहुला-विषहरी की कथा पर आधारित है। इसमें हरे, पीले और गुलाबी जैसे पारंपरिक रंगों का विशेष प्रयोग किया जाता है।
बिहार के प्रसिद्ध वस्त्र और व्यंजन
भागलपुरी रेशम (तसर सिल्क)
भागलपुर को "सिल्क सिटी" कहा जाता है। यहां का तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और अनोखी बुनावट के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
सिलाव का खाजा (नालंदा)
नालंदा के सिलाव की प्रसिद्ध मिठाई खाजा अपनी कुरकुरी बनावट और कई परतों के लिए जानी जाती है। मैदा, चीनी और घी से तैयार होने वाली यह मिठाई बिहार की पारंपरिक मिठास का प्रतीक है।
समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रमाण
बिहार के 16 जीआई टैग प्राप्त उत्पाद राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रमाण हैं। इन उत्पादों को मिली पहचान से न केवल पारंपरिक कलाओं और कृषि उत्पादों को संरक्षण मिल रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। जीआई टैग के माध्यम से बिहार की पहचान अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक बाजार तक पहुंच रही है और "ब्रांड बिहार" को एक नई पहचान मिल रही है।
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