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उजली रातें, बिगड़ता कार्बन संतुलन

कृत्रिम रोशनी से उजली होती रातें, लेकिन धरती का कार्बन संतुलन बिगड़ रहा है

रात का अंधेरा लंबे समय से धरती पर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। लेकिन आज शहरों, कॉलोनियों और हाइवे में बढ़ती कृत्रिम रोशनी इस संतुलन को धीरे-धीरे बिगाड़ रही है।

कृत्रिम रोशनी से उजली होती रातें लेकिन धरती का कार्बन संतुलन बिगड़ रहा है

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कार्बन संतुलन बिगड़ रहा है

रात का अंधेरा लंबे समय से धरती पर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। लेकिन आज शहरों, कॉलोनियों, हाइवे और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती कृत्रिम रोशनी इस संतुलन को धीरे-धीरे बिगाड़ रही है। एक नई वैश्विक स्टडी में पता चला है कि रात में बढ़ती रोशनी अब पृथ्वी के कार्बन संतुलन पर गंभीर असर डाल रही है। स्टडी के अनुसार, रात के समय कृत्रिम प्रकाश पौधों, जीव-जंतुओं और मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ा देता है। इससे वे सामान्य से अधिक कार्बन छोड़ने लगते हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि उनकी कार्बन सोखने की क्षमता नहीं बढ़ती। यानी उत्सर्जन बढ़ रहा है, लेकिन अवशोषण नहीं।

कार्बन संतुलन कैसे बिगड़ रहा है?

वैज्ञानिकों ने बताया कि रात की रोशनी के कारण—

  • पौधे, कीड़े और जानवर अधिक सक्रिय हो जाते हैं,
  • मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की गतिविधि तेज हो जाती है,
  • और इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ जाता है।

लेकिन रात में पौधों में प्रकाश संश्लेषण नहीं होता, इसलिए कार्बन को सोखने की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ता। इसका मतलब है कि कृत्रिम रोशनी केवल उत्सर्जन बढ़ा रही है, अवशोषण बिल्कुल नहीं।

वैज्ञानिकों की चेतावनी

अध्ययन में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के 86 कार्बन मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों और सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि रात की रोशनी महाद्वीपों में कार्बन के निकलने और अवशोषण के पैटर्न को बदल रही है। इसका नतीजा यह है कि इकोसिस्टम की कार्बन जमा करने की क्षमता लगातार घट रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह बदलाव बड़े पैमाने पर हो रहा है और यह जलवायु मॉडल तथा वैश्विक कार्बन बजट के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

आधुनिकता की चमक या पर्यावरण का खतरा

आज कृत्रिम रोशनी को विकास और आधुनिक जीवन का हिस्सा माना जाता है। लेकिन यही रोशनी पर्यावरण और इकोसिस्टम के लिए एक छिपा हुआ खतरा बनती जा रही है।
रात की लगातार बढ़ती रोशनी—

  • प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ रही है,
  • जानवरों के व्यवहार पर असर डाल रही है,
  • पौधों के विकास को प्रभावित कर रही है,
  • और धीरे-धीरे धरती के कार्बन संतुलन को कमजोर कर रही है।

रात का स्वाभाविक अंधेरा सिर्फ आराम या नींद के लिए नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद जरूरी है। अगर रातें लगातार उजली होती रहीं, तो आने वाले समय में धरती का कार्बन संतुलन और अधिक बिगड़ सकता है और जलवायु संकट गहरा सकता है। इसलिए वैज्ञानिक सुझाव देते हैं कि स्मार्ट लाइटिंग, कम तीव्रता वाले लैंप और अनावश्यक रोशनी को कम करना अब समय की जरूरत है।

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