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मेनोपॉज के बाद क्यों बदलती है त्वचा? जानें वजह

मेनोपॉज के बाद क्यों बदलने लगती है त्वचा? जानें हार्मोनल बदलाव और स्किन एजिंग का कनेक्शन

कई महिलाएं सालों तक एक ही डेली स्किनकेयर रूटीन अपनाती हैं और उन्हें इसके अच्छे नतीजे भी मिलते हैं, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब वही प्रोडक्ट्स पहले की तरह असर नहीं दिखाते।

मेनोपॉज के बाद क्यों बदलने लगती है त्वचा जानें हार्मोनल बदलाव और स्किन एजिंग का कनेक्शन

Why Does Skin Change After Menopause? Know the Reasons |

नई दिल्ली: कई महिलाएं सालों तक एक ही डेली स्किनकेयर रूटीन अपनाती हैं और उन्हें इसके अच्छे नतीजे भी मिलते हैं, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब वही प्रोडक्ट्स पहले की तरह असर नहीं दिखाते। चेहरा धोने के तुरंत बाद त्वचा में खिंचाव महसूस हो सकता है। आंखों और मुंह के आसपास की बारीक झुर्रियां गहरी दिखने लगती हैं। जॉलाइन की कसावट कम हो सकती है या अच्छी नींद लेने के बाद भी चेहरा थका हुआ नजर आ सकता है। हालांकि, इन बदलावों के लिए उम्र बढ़ने को जिम्मेदार मानना स्वाभाविक है, लेकिन 40 और 50 की उम्र के आसपास महिलाओं में इसके पीछे एक और बड़ी वजह होती है। वह है मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति। इस आर्टिकल में डॉ. मित्रा अमीरी मेनोपॉज और त्वचा की उम्र बढ़ने के बीच संबंध के बारे में बताती हैं। साथ ही समझाती हैं कि इस दौरान त्वचा में तेजी से बदलाव क्यों होते हैं और उनकी देखभाल कैसे की जा सकती है।

मेनोपॉज के दौरान त्वचा में क्या बदलाव होते हैं?

त्वचा को मुलायम, हाइड्रेटेड और मजबूत बनाए रखने में एस्ट्रोजन हार्मोन की अहम भूमिका होती है। यह त्वचा के सुरक्षात्मक बैरियर को सहारा देने के साथ कोलेजन और प्राकृतिक तेलों के उत्पादन में मदद करता है। जब मेनोपॉज से पहले और बाद में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है, तो त्वचा में कई तरह के संरचनात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

  • कोलेजन की कमी: रिसर्च के मुताबिक, मेनोपॉज के बाद शुरुआती पांच वर्षों में महिलाओं की त्वचा का 30 प्रतिशत तक कोलेजन कम हो सकता है। इससे त्वचा पतली और कम लचीली हो जाती है और उस पर बारीक झुर्रियां आसानी से नजर आने लगती हैं।
  • त्वचा में रूखापन: हार्मोन का स्तर घटने से त्वचा में प्राकृतिक सीबम का उत्पादन कम हो सकता है। इससे त्वचा की नमी बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • बनावट और पिगमेंटेशन में बदलाव: सन स्पॉट, मेलास्मा और त्वचा पर असमान रंगत वाले धब्बे अधिक दिखाई दे सकते हैं। वहीं, त्वचा की ऊपरी परत रूखी और संवेदनशील हो सकती है।
  • त्वचा की कसावट कम होना: चेहरे पर मौजूद फैट पैड अपनी जगह से खिसक सकते हैं और उनका आकार कम हो सकता है। इससे गालों और गर्दन के आसपास त्वचा ढीली नजर आने लगती है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि त्वचा में होने वाले सभी बदलाव सिर्फ हार्मोन की वजह से नहीं होते। लंबे समय तक धूप में रहना, आनुवंशिक कारण, खानपान और तनाव भी त्वचा की उम्र बढ़ने को प्रभावित करते हैं।

मिडलाइफ में एक जैसा स्किनकेयर रूटीन क्यों नहीं करता काम?

मिडलाइफ में महिलाओं को अक्सर एक साथ कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे गालों पर रूखे धब्बे, माथे पर काले निशान और ठुड्डी के आसपास त्वचा की कसावट कम होना। ऐसे में हर समस्या को एक ही हार्ड प्रोडक्ट या ट्रेंड में चल रहे एंटी-एजिंग पैकेज से ठीक करने की कोशिश कारगर नहीं होती। कई बार ज्यादा असरदार एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे लालिमा और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहले रोजाना के रूटीन को आसान और प्रभावी बनाना जरूरी है।

  •  हल्की क्लींजिंग: ऐसे क्लींजर का इस्तेमाल करें जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को खत्म न करें।
  •  गहरी नमी: हाइलूरोनिक एसिड, ग्लिसरीन और सेरामाइड्स वाले प्रोडक्ट्स त्वचा में नमी बनाए रखने और उसकी बाहरी परत को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
  •  धूप से बचाव: रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करना जरूरी है। इससे डार्क स्पॉट्स और कोलेजन को होने वाले नुकसान से बचाव में मदद मिलती है।
  •  एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का सावधानी से इस्तेमाल: रेटिनॉइड्स और विटामिन C जैसे तत्व कोलेजन को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन रूखी और संवेदनशील त्वचा में जलन से बचने के लिए इनका इस्तेमाल धीरे-धीरे करना चाहिए।

मॉडर्न एस्थेटिक ट्रीटमेंट कैसे करते हैं मदद?

जब सामान्य स्किनकेयर प्रोडक्ट्स से मनचाहा परिणाम नहीं मिलता, तो क्लिनिकल एस्थेटिक ट्रीटमेंट्स एक विकल्प हो सकते हैं। दिल्ली में भी एंटी-एजिंग से जुड़े कई तरह के क्लिनिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं। हालांकि, किसी भी प्रक्रिया को अपनाने से पहले त्वचा की मेडिकल जांच जरूरी है। ट्रीटमेंट का चुनाव ऑनलाइन ट्रेंड्स के बजाय त्वचा की जरूरतों के आधार पर होना चाहिए।

  • बारीक झुर्रियों और रूखी बनावट के लिए: हल्की स्किन रिसर्फेसिंग प्रक्रियाएं और लेजर ट्रीटमेंट त्वचा की ऊपरी परत को स्मूद करने में मदद कर सकते हैं। गहरे स्किन टोन वाली महिलाओं में ऐसे विकल्पों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए, ताकि उपचार के बाद पिगमेंटेशन की समस्या न हो।
  • त्वचा की कसावट बढ़ाने के लिए: रेडियोफ्रीक्वेंसी और अल्ट्रासाउंड जैसी ऊर्जा आधारित तकनीकें और कोलेजन को बढ़ावा देने वाले इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट समय के साथ त्वचा की कसावट में सुधार कर सकते हैं।
  • चेहरे की खोई हुई मात्रा वापस लाने के लिए: हयालूरोनिक एसिड डर्मल फिलर्स की मदद से चेहरे के कुछ खास हिस्सों में कम हुई मात्रा को बहाल किया जा सकता है। हालांकि, जहां समस्या सिर्फ त्वचा के ढीलेपन की हो, वहां फिलर्स का इस्तेमाल चेहरे को अस्वाभाविक लुक दे सकता है। इसलिए पहले चेहरे का सही आकलन जरूरी है।

क्या HRT से वापस आ सकती है जवां त्वचा?

कई महिलाओं के मन में सवाल होता है कि क्या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) शुरू करने से उनकी त्वचा पहले जैसी जवां हो सकती है। हार्मोन थेरेपी कुछ महिलाओं में त्वचा की नमी बेहतर बनाने और कोलेजन के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, डॉक्टर केवल त्वचा को जवां दिखाने के उद्देश्य से HRT नहीं देते हैं। इसका मुख्य इस्तेमाल मेनोपॉज से जुड़े अन्य लक्षणों, जैसे गर्मी लगना और रात में पसीना आने की समस्या के इलाज के लिए किया जाता है। डॉ. मित्रा अमीरी के अनुसार, इस दौरान स्किनकेयर का उद्देश्य हर झुर्री को मिटाना या उम्र के असर को पूरी तरह छिपाना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय त्वचा को स्वस्थ, आरामदायक और लचीला बनाए रखना जरूरी है, ताकि महिलाएं अपनी त्वचा को लेकर आत्मविश्वास महसूस कर सकें।

सही देखभाल से त्वचा को रखा जा सकता है स्वस्थ

दिल्ली में किसी भरोसेमंद स्किन स्पेशलिस्ट और योग्य त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेकर त्वचा की बदलती जरूरतों के अनुसार डेली स्किनकेयर रूटीन में बदलाव किया जा सकता है। इससे त्वचा की सेहत और उसकी चमक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अगर आप अपनी त्वचा के लिए व्यक्तिगत सलाह चाहती हैं, तो ग्रेटर कैलाश, दिल्ली स्थित डर्मा आर्ट्स में डॉ. मित्रा अमीरी से परामर्श ले सकती हैं। वह आपकी त्वचा की जरूरतों के अनुसार सही देखभाल योजना चुनने में मदद कर सकती हैं।

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