प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

जानिए पद्मा एकादशी का महत्व

पद्मा एकादशी 2026: व्रत और पूजा की संपूर्ण विधि

पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने, व्रत रखने तथा जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

पद्मा एकादशी 2026 व्रत और पूजा की संपूर्ण विधि

लक्ष्मीनारायण | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। कई क्षेत्रों में इसे जलझूलनी एकादशी और कर्मा-धर्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

पद्मा एकादशी के दिन क्या करें?

पद्मा एकादशी पर सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें।

तुलसी अर्पित कर करें मंत्र जाप

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान को तुलसी दल अर्पित करके—

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

मंत्र का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार विष्णु सहस्रनाम, विष्णु स्तुति, विष्णु गायत्री या भगवद्गीता का पाठ भी कर सकते हैं।

पद्मा एकादशी की कथा सुनें

एकादशी व्रत में व्रत कथा के श्रवण और पाठ की परंपरा है। इसलिए पूजा के दौरान पद्मा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। कथा के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

अपनी क्षमता के अनुसार रखें व्रत

पद्मा एकादशी पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या जल ग्रहण करके व्रत करते हैं। एकादशी व्रत की विभिन्न परंपराओं में अनाज और दालों का सेवन न करने का नियम भी बताया गया है। हालांकि व्रत की विधि परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, गर्भावस्था, वृद्धावस्था या नियमित दवाओं की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

दान-पुण्य करना माना जाता है शुभ

पद्मा एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता में दान को सेवा और परोपकार से जोड़ा गया है। इसलिए इस दिन किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

दिनभर इन बातों का रखें ध्यान

एकादशी के दिन भगवान विष्णु का नाम-स्मरण करने के साथ सात्विक आचरण रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध, विवाद, अपशब्द और किसी को कष्ट देने से बचना चाहिए। मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों से भी दूर रहने की परंपरा है। दिनभर भगवान विष्णु के मंत्र का जाप और भजन-कीर्तन किया जा सकता है।

हरिवासर के बाद करें व्रत का पारण

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। परंतु इस वर्ष एकादशी पर हरिवसार का योग बन रहा है। इसीलिए जो लोग हरिवसार का वरट करना चाहते हैं, वो ,लोग 24 सितंबर को व्रत का परं करेंगे।

पारण के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को देखना जरूरी है, क्योंकि सूर्योदय, तिथि और स्थान के अनुसार पारण का समय बदल सकता है।

पद्मा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार पद्मा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा के माध्यम से भक्त भगवान विष्णु से सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। पद्मा एकादशी का संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह दिन संयम, भक्ति, सेवा और सात्विक जीवनशैली को अपनाने की प्रेरणा देता है।

नोट: पद्मा एकादशी की पूजा-विधि, व्रत के नियम और पारण की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों तथा वैष्णव संप्रदायों में कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए तिथि और पारण के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

यह भी पढ़ेंः 22 सितंबर 2026 मंगलवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग

Related to this topic: