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रक्षाबंधन पर राखी बांधने की पूरी विधि

रक्षाबंधन पर राखी कैसे बांधें? जानिए पूजा की थाली से लेकर राखी बांधने तक की पूरी विधि

रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार करें, भाई का तिलक कर आरती उतारें और दाहिनी कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना करें।

रक्षाबंधन पर राखी कैसे बांधें जानिए पूजा की थाली से लेकर राखी बांधने तक की पूरी विधि

Raksha Bandhan 2026: Know the Complete Ritual of Tying Rakhi |

नई दिल्ली (भारत)। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना करती है। धार्मिक परंपराओं में राखी बांधने से पहले भगवान की पूजा और भाई का तिलक करने की विधि बताई गई है।

सबसे पहले तैयार करें पूजा की थाली

राखी बांधने से पहले एक थाली में ये सामग्री रखी जा सकती है—
राखी
रोली या कुमकुम
अक्षत यानी साबुत चावल
दीपक और घी
मिठाई
फूल
आरती के लिए दीपक

सामग्री स्थानीय परंपरा और अपनी सुविधा के अनुसार रखें।

राखी बांधने की पूरी प्रक्रिया

भगवान का स्मरण करें:
सबसे पहले पूजा स्थान पर दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। भाई-बहन के सुख और परिवार की मंगलकामना करें।

भाई को आसन पर बैठाएं:
भाई को स्वच्छ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना कई पारंपरिक विधियों में शुभ माना जाता है।

तिलक लगाएं:
बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं और उसके ऊपर अक्षत लगाएं।

आरती उतारें:
इसके बाद भाई की आरती उतारें। इस दौरान भगवान से उसके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।

दाहिनी कलाई पर बांधें राखी:
भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय रक्षा सूत्र से जुड़ा प्रचलित मंत्र पढ़ा जा सकता है—
                             “येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
                              तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

मिठाई खिलाएं:
राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं। भाई भी बहन को मिठाई खिलाकर उसके सुख और समृद्धि की कामना कर सकता है।

भाई-बहन लें आशीर्वाद:
अंत में दोनों भगवान और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। भाई अपनी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प ले सकता है।

राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान

राखी बहुत ज्यादा कसकर न बांधें, ताकि कलाई पर परेशानी न हो। पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साबुत हों तो बेहतर माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राखी बांधने की विधि में प्रेम, सम्मान और रक्षा का भाव बना रहे।

ध्यान दें: राखी बांधने की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में थोड़ी अलग हो सकती है। ऊपर दी गई प्रक्रिया सामान्य धार्मिक परंपराओं पर आधारित है।

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