श्रावणी पूर्णिमा पर स्नान, पूजा, रक्षाबंधन और दान-पुण्य की परंपरा है। इस दिन श्रद्धा से पूजा करने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना पर्व की भावना को और सार्थक माना जाता है।
Shravani Purnima 2026: Know the Puja Rituals, Rakhi Tradition and Importance of Charity | AI Image
नई दिल्ली (भारत)। सावन महीने की पूर्णिमा को श्रावणी पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन स्नान, पूजा, दान, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। इसी दिन कई क्षेत्रों में रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने आराध्य देव की पूजा करने की परंपरा है।
सुबह स्नान से करें दिन की शुरुआत
श्रावणी पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। संभव हो तो स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है। इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित कर भगवान का ध्यान करें।
घर के मंदिर में करें पूजा
पूजा स्थान की सफाई करके दीपक जलाएं। अपने आराध्य देव की पूजा करें। भगवान शिव को बेलपत्र और जल अर्पित किया जा सकता है, जबकि भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल और फल चढ़ाने की परंपरा है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
रक्षाबंधन पर बांधें राखी
श्रावणी पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन होने पर बहन भाई को तिलक लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधती है। इसके बाद आरती उतारकर मिठाई खिलाई जाती है। भाई बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हुए उसे उपहार देता है।
दान-पुण्य का भी है महत्व
इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, चावल, दूध या अन्य आवश्यक वस्तुओं का जरूरतमंदों को दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता में पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य को शुभ माना गया है।
कई क्षेत्रों में मनाया जाता है उपाकर्म
श्रावणी पूर्णिमा का संबंध कुछ परंपराओं में उपाकर्म से भी है। विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय के कुछ वर्गों में इस दिन यज्ञोपवीत बदलने और वैदिक अध्ययन से जुड़े अनुष्ठान करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि अलग हो सकती है।
क्या करें और क्या न करें?
श्रावणी पूर्णिमा पर घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें, जरूरतमंदों की मदद करें और परिवार के साथ शांतिपूर्वक पर्व मनाएं। क्रोध, विवाद और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। भोजन और व्रत अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही रखें। श्रावणी पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा, दान और आपसी प्रेम को मजबूत करने का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धा से पूजा करने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना पर्व की भावना को और सार्थक बनाता है।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)
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