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आज का पंचांग

10 अक्टूबर 2026 शनिवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि और हस्त नक्षत्र का संयोग

आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रहेगी। अमावस्या तिथि रात करीब 9:19 बजे तक रहेगी, इसके बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होगी।

10 अक्टूबर 2026 शनिवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि और हस्त नक्षत्र का संयोग

जानें आज का पंचांग | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना

विक्रम संवत: 2083

मास: आश्विन

ऋतु: शरद ऋतु

पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: अमावस्या — रात 9:19 बजे तक, इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा

नक्षत्र: हस्त — रात 9:42 बजे तक, इसके बाद चित्रा

योग: इंद्र — रात 10:02 बजे तक, इसके बाद वैधृति

करण: चतुष्पाद — सुबह 9:24 बजे तक, इसके बाद नाग — रात 9:19 बजे तक

वार: शनिवार

चंद्र राशि: कन्या

सूर्य राशि: कन्या

अयन: दक्षिणायन

सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे लगभग

सूर्यास्त: शाम 5:57 बजे लगभग

चंद्रोदय: उदय नहीं

चंद्रास्त: अस्त नहीं

दिन का चौघड़िया

प्रकृति        फल            समय अवधि

काल            हानि               प्रातः 6:19 से 7:46 बजे तक
शुभ             उत्तम              प्रातः 7:46 से 9:13 बजे तक
रोग             अमंगल           प्रातः 9:13 से 10:41 बजे तक
उद्वेग          अशुभ             प्रातः 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक
चर             सामान्य           दोपहर 12:08 से 1:35 बजे तक
लाभ           उन्नति             दोपहर 1:35 से 3:02 बजे तक
अमृत          सर्वोत्तम         दोपहर 3:02 से 4:30 बजे तक
काल           हानि             शाम 4:30 से 5:57 बजे तक

रात का चौघड़िया

प्रकृति        फल                समय अवधि

लाभ           उन्नति               शाम 5:57 से 7:30 बजे तक
उद्वेग         अशुभ               रात 7:30 से 9:02 बजे तक
शुभ           उत्तम                रात 9:02 से 10:35 बजे तक
अमृत        सर्वोत्तम             रात 10:35 से 12:08 बजे तक
चर           सामान्य              रात 12:08 से 1:40 बजे तक
रोग          अमंगल              रात 1:40 से 3:13 बजे तक
काल         हानि                 रात 3:13 से 4:46 बजे तक
लाभ         उन्नति                सुबह 4:46 से 6:19 बजे तक

शुभ और अशुभ मुहूर्त

ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:40 से 5:30 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

गोधूलि बेला: शाम करीब 5:57 से 6:21 बजे तक

अमृत काल: दोपहर करीब 3:36 से 5:14 बजे तक

राहुकाल: सुबह 9:13 से 10:41 बजे तक

यमगंड: दोपहर 1:35 से 3:02 बजे तक

गुलिक काल: सुबह 6:19 से 7:46 बजे तक

दुर्मुहूर्त: सुबह करीब 6:19 से 7:05 बजे तक तथा 7:05 से 7:52 बजे तक

दिशा शूल: पूर्व दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा आवश्यक होने पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।

ग्रह गोचर स्थिति

ग्रह                राशि

सूर्य                कन्या
चंद्रमा            कन्या
मंगल             मिथुन
बुध                कन्या
गुरु                कर्क
शुक्र               तुला
शनि               मीन
राहु                कुंभ
केतु               सिंह

आज के प्रमुख धार्मिक अवसर

सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या कहलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा या अमावस्या तिथि को हुआ हो, ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया। इस दिन पितरों का स्मरण, जल तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। श्राद्ध कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में करना चाहिए।

आज क्या करें?

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पितरों का स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल और काले तिल से तर्पण करें।
  • सर्वपितृ अमावस्या पर उन पितरों के लिए श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध छूट गया है।
  • श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का समय स्थानीय पंचांग से देखें।
  • जरूरतमंदों को भोजन, अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  • शनिवार होने के कारण शनिदेव का स्मरण करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
  • कौवे, गाय या अन्य जीवों को भोजन देना चाहें तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
  • पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या का पालन करें।
  • श्राद्ध कर्म में अपने कुलाचार और स्थानीय परंपराओं को प्राथमिकता दें।

Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।

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