आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। सुबह करीब 11:56 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहने के बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्दशी — सुबह करीब 11:56 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा
नक्षत्र: रेवती — शाम करीब 7:22 बजे तक, इसके बाद अश्विनी
योग: हर्षण — शाम करीब 5:22 बजे तक, इसके बाद वज्र
करण: वणिज — सुबह करीब 11:56 बजे तक, इसके बाद विष्टि (भद्रा)
वार: रविवार
चंद्र राशि: मीन — शाम करीब 7:22 बजे तक, इसके बाद मेष
सूर्य राशि: तुला
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:28 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:42 बजे
चंद्रोदय: शाम करीब 4:56 से 5:00 बजे के बीच
चंद्रास्त: 26 अक्टूबर की सुबह करीब 6:23 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
उद्वेग — अशुभ — सुबह 6:28 से 7:52 बजे तक
चर — सामान्य — सुबह 7:52 से 9:17 बजे तक
लाभ — उन्नति — सुबह 9:17 से 10:41 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 बजे तक
काल — हानि — दोपहर 12:05 से 1:29 बजे तक
शुभ — उत्तम — दोपहर 1:29 से 2:53 बजे तक
रोग — अमंगल — दोपहर 2:53 से 4:18 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — शाम 4:18 से 5:42 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
शुभ — उत्तम — शाम 5:42 से 7:18 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — रात 7:18 से 8:54 बजे तक
चर — सामान्य — रात 8:54 से 10:30 बजे तक
रोग — अमंगल — रात 10:30 से 12:06 बजे तक
काल — हानि — रात 12:06 से 1:42 बजे तक
लाभ — उन्नति — रात 1:42 से 3:18 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — रात 3:18 से 4:53 बजे तक
शुभ — उत्तम — सुबह 4:53 से 6:28 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:46 से 5:37 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 1:57 से 2:42 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:42 से 6:07 बजे तक
राहुकाल: शाम 4:18 से 5:42 बजे तक
यमगंड: दोपहर 12:05 से 1:29 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:54 से 4:18 बजे तक
दिशा शूल: रविवार को पारंपरिक मान्यता के अनुसार पश्चिम दिशा में दिशा शूल माना जाता है। यात्रा करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपाय किए जाते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रहः राशि
सूर्य: तुला
चंद्रमा: मीन से मेष
मंगल: कर्क
बुध: तुला
गुरु: कर्क
शुक्र: तुला
शनि: मीन
राहु: कुंभ
केतु: सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शरद पूर्णिमा का पर्व: आज शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और कोजगरा पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है और चंद्रमा की रोशनी का विशेष महत्व माना जाता है। कई क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर भक्ति करने वाले लोगों पर कृपा करती हैं। इसी कारण कुछ स्थानों पर इसे कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। यह धार्मिक आस्था और क्षेत्रीय परंपराओं से जुड़ा पर्व है।
माता लक्ष्मी की पूजा: शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। श्रद्धालु घर के पूजा स्थल की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और फल, पुष्प तथा मिठाई अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा, दान और सेवा करने से परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना की जाती है।
चंद्रदेव की पूजा और खीर की परंपरा: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। कई परिवार दूध और चावल से खीर बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं। कुछ स्थानों पर खीर को चांदनी में रखने की परंपरा भी निभाई जाती है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या पढ़ें।
- शाम को चंद्रमा के दर्शन करके अपनी परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें।
- खीर या अन्य सात्त्विक भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाएं।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
- परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठान करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- पूजा और व्रत के नियमों का पालन अपनी पारिवारिक परंपरा तथा स्वास्थ्य के अनुसार करें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण पूजा, व्रत या शुभ कार्य से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
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