आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ दिन की शुरुआत होगी। सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट तक द्वादशी रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी।
नई दिल्ली (भारत)। आज धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना मंगलकारी माना जाता है। वहीं प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और यमदीपदान करने की परंपरा भी प्रचलित है।
मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: कार्तिक
ऋतु: शरद
अयन: दक्षिणायन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: द्वादशी सुबह लगभग 10:30 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी
नक्षत्र: हस्त, 7 नवंबर की सुबह लगभग 4:43 बजे तक; इसके बाद चित्रा
योग: विष्कुम्भ, 7 नवंबर की सुबह लगभग 4:10 बजे तक; इसके बाद प्रीति
करण: तैतिल सुबह लगभग 10:30 बजे तक, इसके बाद गर और फिर वणिज
वार: शुक्रवार
चंद्र राशि: कन्या
सूर्य राशि: तुला
सूर्योदय: सुबह 6:36 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:32 बजे
चंद्रोदय: 7 नवंबर की सुबह लगभग 3:40 बजे
चंद्रास्त: दोपहर लगभग 3:35 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
चर — सामान्य — सुबह 6:36 से 7:58 बजे तक
लाभ — उन्नति — सुबह 7:58 से 9:20 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — सुबह 9:20 से 10:42 बजे तक
काल — हानि — सुबह 10:42 से दोपहर 12:04 बजे तक
शुभ — उत्तम — दोपहर 12:04 से 1:26 बजे तक
रोग — अमंगल — दोपहर 1:26 से 2:48 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — दोपहर 2:48 से शाम 4:10 बजे तक
चर — सामान्य — शाम 4:10 से 5:32 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
रोग — अमंगल — शाम 5:32 से 7:10 बजे तक
काल — हानि — 7:10 से 8:48 बजे तक
लाभ — उन्नति — रात 8:48 से 10:26 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — रात 10:26 से 12:04 बजे तक
शुभ — उत्तम — रात 12:04 से 1:43 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — रात 1:43 से 3:21 बजे तक
चर — सामान्य — रात 3:21 से 4:59 बजे तक
रोग — अमंगल — सुबह 4:59 से 6:37 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 से 2:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:32 से 5:58 बजे तक
अमृत काल: रात लगभग 10:31 बजे से 7 नवंबर की रात 12:10 बजे तक
राहुकाल: सुबह 10:42 से दोपहर 12:04 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 2:48 से शाम 4:10 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:58 से 9:20 बजे तक
दिशा शूल: पश्चिम दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा से बचने की परंपरा है। आवश्यक यात्रा होने पर जौ का सेवन करके निकलने का पारंपरिक उपाय बताया जाता है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह — राशि — नक्षत्र
सूर्य — तुला — स्वाति
चंद्रमा — कन्या — हस्त
मंगल — कर्क — अश्लेषा
बुध — तुला — स्वाति
गुरु — सिंह — मघा
शुक्र — कन्या — चित्रा
शनि — मीन — उत्तराभाद्रपद
राहु — कुंभ — धनिष्ठा
केतु — सिंह — मघा
आज के प्रमुख व्रत और त्योहार
धनतेरस
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का भी विधान है। घरों और दुकानों में साफ-सफाई करके दीप जलाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबा और रसोई के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। खरीदारी का समय चुनते हुए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए।
यमदीपदान
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस दीपदान को यमदीपदान कहा जाता है। परंपरा के अनुसार आटे या मिट्टी का दीपक जलाकर उसमें तेल और बत्ती रखी जाती है। दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की रक्षा और सभी सदस्यों की लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है।
रमा एकादशी व्रत का पारण
कार्तिक कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 6 नवंबर को द्वादशी तिथि में पारण करेंगे। पारण का समय स्थानीय पंचांग में देखें। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्चना और जरूरतमंदों को भोजन या अन्न दान करने का विशेष महत्व माना जाता है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और भगवान धन्वंतरि का स्मरण करें।
- रमा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु उचित द्वादशी पारण समय का ध्यान रखें।
- घर, दुकान और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
- धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें।
- शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करें।
- प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करें।
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरत की वस्तुओं का दान करें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत और पूजा का समय अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से अवश्य जांचें।
यह भी पढ़ेंः रमा एकादशी: 5 नवंबर को रखा जाएगा व्रत, जानें भगवान विष्णु की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पारण समय और व्रत कथा