आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। आज रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र तथा वैधृति योग का संयोग रहेगा।
नई दिल्ली (भारत)। आज एकादशी तिथि सुबह करीब 10:35 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र 6 नवंबर की सुबह करीब 3:55 बजे तक रहेगा। वैधृति योग 6 नवंबर की सुबह करीब 5:09 बजे तक रहेगा। सूर्योदय सुबह करीब 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम करीब 5:33 बजे होगा।
मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: कार्तिक
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: एकादशी — सुबह करीब 10:35 बजे तक, इसके बाद द्वादशी
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी — 6 नवंबर की सुबह करीब 3:55 बजे तक, इसके बाद हस्त
योग: वैधृति — 6 नवंबर की सुबह करीब 5:09 बजे तक, इसके बाद विष्कुंभ
करण: बालव — सुबह करीब 10:35 बजे तक; इसके बाद कौलव, जो रात करीब 10:30 बजे तक रहेगा। फिर तैतिल करण शुरू होगा।
वार: गुरुवार
चंद्र राशि: सिंह — सुबह करीब 9:34 बजे तक, इसके बाद कन्या
सूर्य राशि: तुला
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:36 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:33 बजे
चंद्रोदय: 6 नवंबर की सुबह करीब 3:45 बजे
चंद्रास्त: दोपहर करीब 3:01 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
शुभ — उत्तम — सुबह 6:36 से 7:58 बजे तक
रोग — अमंगल — सुबह 7:58 से 9:20 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — सुबह 9:20 से 10:42 बजे तक
चर — सामान्य — सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
लाभ — उन्नति — दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — दोपहर 1:27 से 2:49 बजे तक
काल — हानि — दोपहर 2:49 से 4:11 बजे तक
शुभ — उत्तम — शाम 4:11 से 5:33 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
चर — सामान्य — शाम 5:33 से 7:11 बजे तक
रोग — अमंगल — रात 7:11 से 8:49 बजे तक
काल — हानि — रात 8:49 से 10:27 बजे तक
लाभ — उन्नति — रात 10:27 से 12:05 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — रात 12:05 से 1:43 बजे तक
शुभ — उत्तम — रात 1:43 से 3:21 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — रात 3:21 से 4:59 बजे तक
चर — सामान्य — सुबह 4:59 से 6:36 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:51 से 5:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:42 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 1:54 से 2:38 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:11 से 5:59 बजे तक
राहुकाल: दोपहर करीब 1:27 से 2:49 बजे तक
यमगंड: सुबह 6:36 से 7:58 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 9:20 से 10:42 बजे तक
अमृत काल: रात करीब 8:36 से 10:13 बजे तक
दिशा शूल: गुरुवार को पारंपरिक मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा में दिशा शूल माना जाता है। यात्रा से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह — राशि — नक्षत्र
सूर्य — तुला — स्वाति
चंद्रमा — सिंह से कन्या — पूर्वा फाल्गुनी से उत्तरा फाल्गुनी
मंगल — कर्क — आश्लेषा
बुध — तुला — स्वाति
गुरु — सिंह — मघा
शुक्र — तुला — चित्रा
शनि — मीन — उत्तराभाद्रपद
राहु — कुंभ — धनिष्ठा
केतु — सिंह — मघा
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
रमा एकादशी
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गोवत्स द्वादशी
आज के पंचांग में गोवत्स द्वादशी भी है। यह पर्व गाय और बछड़े की पूजा से जुड़ा है। इस अवसर पर गाय और बछड़े को स्नान कराकर सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। उन्हें हरा चारा, गुड़ या अन्य उपयुक्त आहार दिया जाता है।
कार्तिक मास में दीपदान
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है। इस महीने में मंदिर, तुलसी के पौधे और घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है। श्रद्धालु शाम के समय दीप जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हैं।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
- रमा एकादशी का व्रत रखें और व्रत कथा सुनें।
- भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, फल या वस्त्र दान करें।
- शाम को घर के मंदिर और तुलसी के पास दीपक जलाएं।
- व्रत का पारण अगले दिन स्थानीय पंचांग में दिए गए द्वादशी पारण समय के अनुसार करें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत और पूजा का समय अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से अवश्य जांचें।
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