माँ शैलपुत्री की पूजा के साथ आज से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वैकल्पिक अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: प्रतिपदा — रात 9:30 बजे तक, इसके बाद द्वितीया
नक्षत्र: चित्रा — रात 10:32 बजे तक, इसके बाद स्वाति
योग: वैधृति — रात 9:05 बजे तक, इसके बाद विष्कुंभ
करण: किंस्तुघ्न — सुबह 9:21 बजे तक, इसके बाद बव — रात 9:30 बजे तक
वार: रविवार
चंद्र राशि: कन्या
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे लगभग
सूर्यास्त: शाम 5:56 बजे लगभग
चंद्रोदय: सुबह 6:52 बजे लगभग
चंद्रास्त: शाम 6:02 बजे लगभग
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
उद्वेग अशुभ सुबह 6:19 से 7:46 बजे तक
चर सामान्य सुबह 7:46 से 9:13 बजे तक
लाभ उन्नति सुबह 9:13 से 10:41 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक
काल हानि दोपहर 12:08 से 1:35 बजे तक
शुभ उत्तम दोपहर 1:35 से 3:02 बजे तक
रोग अमंगल दोपहर 3:02 से 4:29 बजे तक
उद्वेग अशुभ शाम 4:29 से 5:56 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
शुभ उत्तम शाम 5:56 से 7:29 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम रात 7:29 से 9:02 बजे तक
चर सामान्य रात 9:02 से 10:35 बजे तक
रोग अमंगल रात 10:35 से 12:08 बजे तक
काल हानि रात 12:08 से 1:41 बजे तक
लाभ उन्नति रात 1:41 से 3:14 बजे तक
उद्वेग अशुभ रात 3:14 से 4:47 बजे तक
शुभ उत्तम सुबह 4:47 से 6:19 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:40 से 5:29 बजे तक
कलश स्थापना का प्रमुख शुभ मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक
कलश स्थापना का वैकल्पिक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:56 से 6:20 बजे तक
राहुकाल: शाम करीब 4:29 से 5:56 बजे तक
यमगंड: दोपहर 12:08 से 1:35 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 3:02 से 4:29 बजे तक
दिशा शूल: पश्चिम दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो अपनी परंपरा अनुसार उपाय अवश्य करें।
महत्वपूर्ण: इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण घटस्थापना के समय को लेकर पंचांगों में विशेष सावधानी बताई गई है। अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापना करें।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या
चंद्रमा कन्या
मंगल कर्क
बुध तुला
गुरु कर्क
शुक्र तुला
शनि मीन
राहु कुंभ
केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शारदीय नवरात्रि का आरंभ
आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। भक्त नौ दिनों तक व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से देवी की उपासना करते हैं।
मां शैलपुत्री की पूजा
मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल होता है। इनका वाहन वृषभ यानी बैल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को धैर्य, शक्ति और स्थिरता की प्रेरणा मिलती है।
मां शैलपुत्री का मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥
घटस्थापना और कलश स्थापना
नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल पर स्वच्छ मिट्टी में जौ बोकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान कर नौ दिनों की पूजा का संकल्प लिया जाता है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां दुर्गा की चौकी सजाएं।
- शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक कलश स्थापना करें।
- मां शैलपुत्री को सफेद फूल, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करें।
- नौ दिनों तक सात्विक भोजन, संयम और स्वच्छता का ध्यान रखें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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