18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। इस दिन कल्कि जयंती और तीसरा मंगला गौरी व्रत मनाया जाएगा।
नई दिल्ली (भारत)। आज की तिथि एवं विशेष जानकारी
मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
पक्ष व तिथि: श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी (सायं 05:50 बजे तक), इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ।
माह: श्रावण
ऋतु: वर्षा ऋतु
अयन: दक्षिणायन
वार: मंगलवार
नक्षत्र: स्वाती (पूरी रात), इसके बाद 19 अगस्त को सुबह लगभग 06:46 बजे विशाखा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
योग: शुक्ल योग (19 अगस्त की प्रातः लगभग 03:23 बजे तक), इसके बाद ब्रह्म योग।
करण: तैतिल (सायं 05:50 बजे तक), इसके बाद गर (पूरी रात)।
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: सिंह
सूर्योदय: प्रातः 05:52 बजे (लगभग)
सूर्यास्त: सायं 06:58 बजे (लगभग)
चंद्रोदय: प्रातः लगभग 11:00 बजे (लगभग)
चंद्रास्त: रात्रि लगभग 10:37 बजे (लगभग)
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
रोग अमंगल प्रातः 05:52 से 07:30 तक
उद्वेग अशुभ प्रातः 07:30 से 09:09 तक
चर सामान्य प्रातः 09:09 से 10:47 तक
लाभ उन्नति प्रातः 10:47 से 12:25 तक
अमृत सर्वोत्तम दोपहर 12:25 से 02:04 तक
काल हानि दोपहर 02:04 से 03:42 तक
शुभ उत्तम सायं 03:42 से 05:20 तक
रोग अमंगल सायं 05:20 से 06:58 तक
रात्रि का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
काल हानि सायं 06:58 से 08:20 तक
लाभ उन्नति रात्रि 08:20 से 09:42 तक
उद्वेग अशुभ रात्रि 09:42 से 11:04 तक
शुभ उत्तम रात्रि 11:04 से 12:26 तक
अमृत सर्वोत्तम रात्रि 12:26 से 01:48 तक
चर सामान्य रात्रि 01:48 से 03:10 तक
रोग अमंगल रात्रि 03:10 से 04:32 तक
काल हानि प्रातः 04:32 से 05:52 तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:52 बजे तक।
राहुकाल: दोपहर 03:42 बजे से 05:20 बजे तक।
यमगण्ड: प्रातः 09:09 बजे से 10:47 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 12:25 बजे से 02:04 बजे तक।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः लगभग 04:27 बजे से 05:10 बजे तक।
दिशाशूल: उत्तर दिशा। यदि यात्रा आवश्यक हो तो धार्मिक मान्यतानुसार गुड़ का सेवन करके यात्रा प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य सिंह
चंद्रमा तुला
मंगल मिथुन
बुध कर्क
गुरु (बृहस्पति) कर्क
शुक्र कन्या
शनि मीन
राहु कुंभ
केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
तीसरा मंगला गौरी व्रत: मंगलवार होने के कारण सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। माता गौरी की पूजा विवाहित महिलाओं द्वारा दांपत्य सुख, सौभाग्य और परिवार की मंगलकामना के लिए की जाती है।
श्रावण शुक्ल षष्ठी: सावन के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान कार्तिकेय की पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य या व्रत-पूजन से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।)
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