आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। सुबह लगभग 10 बजकर 48 मिनट तक त्रयोदशी रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी।
नई दिल्ली (भारत)। आज मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं। इस दिन रात्रि में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करने की परंपरा है। वहीं काली चौदस पर मां काली और हनुमान जी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन नकारात्मकता से रक्षा और साहस-शक्ति की प्राप्ति के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए।
पंचांग विवरण
विक्रम संवत: 2083
मास: कार्तिक
ऋतु: हेमंत
अयन: दक्षिणायन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: त्रयोदशी सुबह लगभग 10:48 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी
नक्षत्र: चित्रा, 8 नवंबर की सुबह लगभग 5:52 बजे तक; इसके बाद स्वाति
योग: प्रीति, 8 नवंबर की सुबह लगभग 3:27 बजे तक; इसके बाद आयुष्मान
करण: वणिज सुबह लगभग 10:48 बजे तक, इसके बाद विष्टि (भद्रा) रात लगभग 11:05 बजे तक; फिर शकुनि
वार: शनिवार
चंद्र राशि: कन्या, शाम लगभग 5:15 बजे तक; इसके बाद तुला
सूर्य राशि: तुला
सूर्योदय: सुबह 6:37 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:31 बजे
चंद्रोदय: 8 नवंबर की सुबह लगभग 5:36 बजे
चंद्रास्त: शाम लगभग 4:05 बजे
दिन के चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
काल — हानि — सुबह 6:37 से 7:59 बजे तक
शुभ — उत्तम — सुबह 7:59 से 9:21 बजे तक
रोग — अमंगल — सुबह 9:21 से 10:42 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — सुबह 10:42 से दोपहर 12:04 बजे तक
चर — सामान्य — दोपहर 12:04 से 1:26 बजे तक
लाभ — उन्नति — दोपहर 1:26 से 2:48 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — दोपहर 2:48 से 4:10 बजे तक
काल — सामान्य — शाम 4:10 से 5:31 बजे तक
रात के चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
लाभ — उन्नति — शाम 5:31 से 7:10 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — शाम 7:10 से 8:48 बजे तक
शुभ — उत्तम — रात 8:48 से 10:26 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — रात 10:26 से 12:05 बजे तक
चर — सामान्य — रात 12:05 से 1:43 बजे तक
रोग — अमंगल — रात 1:43 से 3:21 बजे तक
काल — हानि — सुबह 3:21 से 4:59 बजे तक
लाभ — अमंगल — सुबह 4:59 से 6:38 बजे तक
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 5:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:32 से 5:58 बजे तक
अमृत काल: रात 11:10 बजे से 8 नवंबर की सुबह 12:50 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक
राहुकाल: सुबह 9:21 से 10:43 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 1:26 से 2:48 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 6:37 से 7:59 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 6:37 से 7:21 बजे तक
भद्रा: सुबह लगभग 10:48 बजे से रात 11:05 बजे तक
वर्ज्य काल: दोपहर 1:06 से 2:47 बजे तक
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह — राशि — नक्षत्र
सूर्य — तुला — विशाखा
चंद्रमा — कन्या — हस्त शाम के बाद चित्रा
मंगल — कर्क — अश्लेषा
बुध — तुला — स्वाति
गुरु — सिंह — मघा
शुक्र — कन्या — चित्रा
शनि — मीन — उत्तराभाद्रपद
राहु — कुंभ — धनिष्ठा
केतु — सिंह — मघा
आज के प्रमुख व्रत और त्योहार
मासिक शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी तथा बेलपत्र अर्पित करते हैं।
काली चौदस
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को काली चौदस कहा जाता है। इसे नरक चतुर्दशी से भी जोड़ा जाता है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन मां काली की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां काली की आराधना से भय, नकारात्मकता और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। श्रद्धालु मां काली को लाल पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं।
शनि देव की पूजा
शनिवार का दिन भगवान शनि देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द, वस्त्र या भोजन दान करते हैं। हनुमान जी की पूजा को भी शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति के लिए लाभकारी माना जाता है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान के बाद भगवान शिव और हनुमान जी का स्मरण करें।
- शनि देव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या काले तिल का दान करें।
- मासिक शिवरात्रि पर रात्रि में भगवान शिव की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करके 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
- काली चौदस पर मां काली की पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ करें और संयम तथा सदाचार का पालन करें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत और पूजा का समय अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से अवश्य जांचें।
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