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वरलक्ष्मी व्रत पर अष्टलक्ष्मी की पूजा

वरलक्ष्मी व्रत 2026: मां लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा से मिलती है आठों लक्ष्मी की कृपा, जानिए व्रत और पूजा विधि

वरलक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी के वरदान देने वाले स्वरूप को समर्पित है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजा करने से अष्टलक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

वरलक्ष्मी व्रत 2026 मां लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा से मिलती है आठों लक्ष्मी की कृपा जानिए व्रत और पूजा विधि

Varalakshmi Vrat 2026 | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। वरलक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन वरलक्ष्मी यानी वरदान देने वाली लक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।

क्यों रखा जाता है वरलक्ष्मी व्रत?

धार्मिक मान्यता के अनुसार वरलक्ष्मी व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और संतान के मंगल के लिए रखती हैं। हालांकि इसे केवल महिलाओं तक सीमित नहीं माना जाता; श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। वरलक्ष्मी को मां लक्ष्मी के ऐसे स्वरूप के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों को धन, धान्य, सुख, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

कब रखा जाता है यह व्रत?

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास की पूर्णिमा से पहले आने वाले शुक्रवार को रखा जाता है। दक्षिण भारतीय पंचांगों में इसे श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से जोड़ा जाता है। तारीख क्षेत्र और पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकती है।

वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि

व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर कलश स्थापित किया जाता है। कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कई घरों में कलश को मां वरलक्ष्मी का प्रतीक मानकर सजाया जाता है। माता को लाल या पीले वस्त्र, फूल, कुमकुम, हल्दी और आभूषण अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा कर वरलक्ष्मी व्रत कथा सुनी जाती है। पूजा के अंत में आरती की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।

आठों लक्ष्मी की पूजा का महत्व

धार्मिक परंपरा में मां लक्ष्मी के आठ प्रमुख स्वरूप बताए गए हैं, जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है। इनमें आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी शामिल हैं। मान्यता है कि वरलक्ष्मी व्रत पर माता की पूजा करने से इन सभी स्वरूपों की कृपा प्राप्त होने की कामना की जाती है।

वरलक्ष्मी व्रत की पौराणिक कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार चारुमती नाम की महिला अपने पति और परिवार के प्रति समर्पित थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी उसके स्वप्न में प्रकट हुईं और वरलक्ष्मी व्रत करने का निर्देश दिया। चारुमती ने परिवार की अन्य महिलाओं के साथ विधि-विधान से व्रत और पूजा की। कथा के अनुसार पूजा के बाद उन्हें धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। तभी से इस व्रत को महिलाओं के बीच विशेष श्रद्धा के साथ मनाने की परंपरा बताई जाती है।

पूजा में इन चीजों का रखें ध्यान

वरलक्ष्मी पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। माता को फूल, फल, मिठाई, कुमकुम और हल्दी अर्पित की जाती है। कई दक्षिण भारतीय परंपराओं में महिलाओं द्वारा रक्षा सूत्र या पवित्र धागा बांधने की भी परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपवास करें। किसी बीमारी, गर्भावस्था या चिकित्सकीय प्रतिबंध की स्थिति में कठोर उपवास करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।

वरलक्ष्मी व्रत का संदेश

वरलक्ष्मी व्रत केवल धन प्राप्ति की कामना का पर्व नहीं है। यह परिवार की खुशहाली, दांपत्य जीवन, सेवा, श्रद्धा और समृद्धि की कामना से जुड़ा धार्मिक उत्सव है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ जरूरतमंदों की मदद और दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

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