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सूजन से दिल को खतरा, हार्ट अटैक 43% बढ़ा

दीर्घकालिक सूजन से दिल को पहुंच सकता है नुकसान, हार्ट अटैक का खतरा 43% ज्यादा: अध्ययन

अध्ययन के मुताबिक, दीर्घकालिक सूजन से लक्षण दिखने से पहले ही दिल को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा 43% तक बढ़ जाता है।

दीर्घकालिक सूजन से दिल को पहुंच सकता है नुकसान हार्ट अटैक का खतरा 43 ज्यादा अध्ययन

Chronic inflammation threatens the heart, increasing the risk of a heart attack by 43% |

वॉशिंगटन: ब्रिटेन के करीब 4.80 लाख वयस्कों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया है कि रोजमर्रा के तनाव, सामाजिक-आर्थिक असमानता और जीवनशैली से जुड़े दीर्घकालिक सूजन के कारण हृदय संबंधी लक्षण दिखाई देने से वर्षों पहले ही दिल को नुकसान पहुंच सकता है। एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मेडिकल साइंसेज (LMS) और इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन लोगों में सूजन का स्तर सबसे अधिक था, उनमें सबसे कम सूजन वाले लोगों की तुलना में दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा 43 प्रतिशत अधिक पाया गया।

4.80 लाख लोगों के डेटा का किया गया विश्लेषण

यूरेका अलर्ट! में प्रकाशित इस अध्ययन को शोधकर्ताओं ने अपनी तरह का सबसे बड़ा अध्ययन बताया है। इसमें यूके बायोबैंक के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसके लिए ग्लाइकोप्रोटीन एसिटाइल (GlycA) नामक रक्त मार्कर, हृदय की इमेजिंग और आनुवंशिक डेटा का इस्तेमाल किया गया।

सूजन से बदल सकती है हृदय की संरचना

शोधकर्ताओं ने पाया कि सूजन का उच्च स्तर हृदय में संरचनात्मक बदलावों से जुड़ा है। इनमें हृदय की दीवारों का मोटा होना, हृदय के कक्षों का छोटा होना और हृदय में रक्त का कम भरना शामिल है। इस तरह के बदलाव वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित हो सकते हैं और आगे चलकर हृदय विफलता का कारण बन सकते हैं।

जीवनशैली और सामाजिक परिस्थितियों से भी संबंध

इंपीरियल कॉलेज लंदन में कार्डियोवैस्कुलर AI के ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन चेयर और LMS में कम्प्यूटेशनल कार्डियक इमेजिंग ग्रुप के प्रमुख प्रोफेसर डेक्लन ओ'रेगन ने कहा कि लाखों लोग ऐसी छिपी हुई सूजन के साथ रह रहे हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे उनके दिल में बदलाव कर रही है और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक सूजन जटिल है, लेकिन यह स्वास्थ्य से जुड़ी है और जीवनशैली तथा आर्थिक परिस्थितियों सहित कई कारकों से प्रभावित होती है।

धूम्रपान और तनाव भी जुड़े जोखिम कारक

अध्ययन में पाया गया कि अधिक सूजन का संबंध सामाजिक-आर्थिक अभाव और मनोवैज्ञानिक तनाव के साथ-साथ धूम्रपान और शरीर में अतिरिक्त वसा जैसे स्थापित जोखिम कारकों से भी मजबूत था। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये निष्कर्ष संकेत देते हैं कि दीर्घकालिक सूजन वह जैविक रास्ता हो सकती है, जिसके जरिए गरीबी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं समेत रोजमर्रा के तनाव हृदय संबंधी जोखिम को बढ़ा सकते हैं। ओ'रेगन ने कहा कि सामाजिक कारकों और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम कारक सूजन और हृदय को होने वाले नुकसान से गहराई से जुड़े पाए गए।

आनुवंशिक कारक भी निभा सकता है भूमिका

शोधकर्ता ने एक मजबूत आनुवंशिक घटक का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कुछ लोग अलग-अलग जीवनशैली से होने वाले सूजन संबंधी नुकसान के प्रति स्वाभाविक रूप से अधिक संवेदनशील या अधिक प्रतिरोधी हो सकते हैं। दीर्घकालिक सूजन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की लंबे समय तक बनी रहने वाली निम्न-स्तरीय सक्रियता को कहा जाता है। इसे कैंसर और मधुमेह सहित कई स्वास्थ्य स्थितियों से जोड़ा गया है और हृदय रोग में भी इसकी भूमिका को तेजी से पहचाना जा रहा है।

कुछ सूजन वाले प्रोटीन बने अध्ययन का केंद्र

अध्ययन में इंटरल्यूकिन-1 और TNF परिवारों के सूजन पैदा करने वाले प्रोटीनों को हृदय को नुकसान पहुंचाने वाले संभावित कारकों के रूप में पहचाना गया है। इनमें से कई प्रोटीन पहले से ही क्लीनिकल ट्रायल में दवाओं के जरिए लक्षित किए जा रहे हैं। इससे यह संभावना सामने आती है कि सूजन-रोधी उपचार लक्षण सामने आने से पहले ही हृदय रोग को रोकने में मदद कर सकते हैं।

शुरुआती पहचान से मिल सकता है फायदा

शोधकर्ताओं ने कहा कि सूजन से जुड़े रक्त परीक्षणों को आनुवंशिक जोखिम स्कोर के साथ मिलाकर ऐसे लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें शुरुआती हस्तक्षेप से फायदा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आनुवंशिक संवेदनशीलता या प्रतिकूल परिस्थितियों के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को हृदय रोग होना ही है। दीर्घकालिक सूजन को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं।

'सूजन शरीर की उपचार प्रक्रिया का हिस्सा'

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर ब्रायन विलियम्स ने कहा कि सूजन शरीर की उपचार प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में सूजन का स्तर अधिक था, उनके हृदय की संरचना में बिना लक्षण के बदलाव हुए और उनमें दिल का दौरा तथा स्ट्रोक जैसी प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा अधिक था। विलियम्स के अनुसार, शोध से यह समझने में मदद मिलती है कि जीन और धूम्रपान, खराब मानसिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे जीवनशैली कारक मिलकर किस तरह सूजन को बढ़ा सकते हैं।

सूजन-रोधी दवाओं से उम्मीद

विलियम्स ने कहा कि अध्ययन में कुछ ऐसे सूजन पैदा करने वाले प्रोटीनों की पहचान हुई है, जो दीर्घकालिक सूजन से जुड़े हृदय संबंधी बदलावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सूजन-रोधी दवाएं भविष्य में हृदय रोग की रोकथाम का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि निष्कर्ष सूजन और खराब हृदय स्वास्थ्य के कारणों से निपटने के साथ-साथ लोगों को ऐसे जीवनशैली बदलाव अपनाने के महत्व को रेखांकित करते हैं, जो हृदय की रक्षा में मदद कर सकते हैं। इस अध्ययन को मेडिकल रिसर्च काउंसिल और ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने वित्त पोषित किया था। इसे एनआईएचआर इंपीरियल बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर से भी अतिरिक्त सहायता मिली, जो इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर NHS ट्रस्ट और इंपीरियल कॉलेज लंदन के बीच एक ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्टनरशिप है। अध्ययन के निष्कर्ष यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।

(एएनआई)

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