अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मून मिशन आर्टेमिस-2 टलेगा। इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था। उससे पहले ही रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत सामने आ गई।
वाशिंगटन। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मून मिशन आर्टेमिस-2 टलेगा। इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था। उससे पहले ही रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत सामने आ गई। स्पेस एजेंसी ने बताया कि लॉन्च के लिए सॉलिड हीलियम फ्लो की जरूरत होती है। यह फ्लो बीती रात ही रॉकेट के ऊपरी स्टेज में रुक गया।
लॉन्च पैड या हैंगर में समस्या ठीक करने के विकल्प तैयार
नासा ने कहा कि वह सारे डेटा की समीक्षा कर रहा है और अगर जरूरी हुआ तो रॉकेट को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड से हैंगर ले जाया जाएगा। हालांकि इंजीनियर लॉन्च पैड पर ही दिक्कत ठीक करने की कोशिश करेंगे। स्पेस एजेंसी ने कहा कि इंजीनियर दोनों ऑप्शन की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसका असर लॉन्चिंग पर जरूर पड़ेगा।
चांद पर कदम नहीं रखेंगे अंतरिक्ष यात्री
आर्टेमिस-2 मून मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स चांद पर कदम नहीं रखेंगे। ये एक फ्लाईबाई मिशन है जिसके तहत अंतरिक्ष यात्री सिर्फ चांद के चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा जब इंसान चांद की कक्षा में जाएगा। अगर ये मिशन सफल होता है 2028 में आर्टेमिस-3 मिशन भेजा जाएगा, जिसमें जाने वाले अंतरिक्ष यात्री चांद पर पैर रखेंगे।
पहली बार महिला और अफ्रीकन-अमेरिकन एस्ट्रोनॉट शामिल
आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों तरफ चक्कर लगाकर वापस धरती पर आएंगे। इन क्रू में पहली बार एक महिला और एक अफ्रीकन-अमेरिकन (अश्वेत) एस्ट्रोनॉट भी शामिल होगा। 10 दिन के इस मून मिशन के लिए क्रिस्टीना हैमॉक कोच को विशेषज्ञ के तौर पर चुना गया है। इससे पहले क्रिस्टीना सबसे ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। उनके अलावा अमेरिकी नेवी के विक्टर ग्लोवर को भी बतौर पायलट चुना गया है। वो पहले ब्लैक एस्ट्रोनॉट होंगे जो मून मिशन पर स्पेस जाएंगे।
22 लाख किलोमीटर की यात्रा का टारगेट
आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान करीब 22 लाख किलोमीटर की यात्रा करेगा। इसका मकसद ये जांचना है कि ओरियन स्पेसशिप के सभी लाइफ-सपोर्ट सिस्टम ठीक से डिजाइन किए गए हैं। जिससे एस्ट्रोनॉट्स को डीप स्पेस में जाने और 2028 में मून लैंडिंग के दौरान परेशानी न हो। आर्टेमिस-2 वापस लौटने से पहले चंद्रमा के सुदूर भाग से कुछ 10,300 किलोमीटर दूर तक जाएगा।
आर्टेमिस-1 ने पूरी की 14 लाख मील की यात्रा
नासा ने 15 नवंबर, 2022 को तीसरी कोशिश में आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया था। ये 25 दिन बाद 14 लाख मील की यात्रा पूरी करके 10 दिसंबर को धरती पर लौट आया था। इससे पहले दिसंबर 1972 में अपोलो-17 मिशन ही चांद के इतने करीब पहुंचा था।
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