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ग्लियोब्लास्टोमा इलाज में नई उम्मीद

ग्लियोब्लास्टोमा उपचार में नई उम्मीद: विटामिन B12 आधारित नई थेरेपी से शोध में सफलता

यह नई विटामिन बी12 थेरेपी घातक मस्तिष्क कैंसर के खिलाफ आशाजनक परिणाम दिखा रही है।

ग्लियोब्लास्टोमा उपचार में नई उम्मीद विटामिन b12 आधारित नई थेरेपी से शोध में सफलता

New Study Finds Promising Approach for Glioblastoma Treatment Using Vitamin B12-Based Therapy |

वॉशिंगटन डीसी,(अमेरिका)। ऑनकोसाइंस में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज के लिए एक नए और संभावित प्रभावी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया है। ग्लियोब्लास्टोमा मस्तिष्क का एक अत्यंत आक्रामक और उपचार-प्रतिरोधी कैंसर है, जिसका इलाज अभी भी काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

जोसेफ ए. बाउर के नेतृत्व में हुआ शोध

इस शोध का शीर्षक है “ग्लियोब्लास्टोमा में नाइट्रोसिलकोबालामिन का चयनात्मक रक्त-मस्तिष्क अवरोध भेदन और ट्यूमर लक्ष्यीकरण: फार्माकोकाइनेटिक्स, ऊतक वितरण और TRAIL तथा टेमोज़ोलोमाइड के साथ सहक्रियात्मक गतिविधि”।
यह अध्ययन नाइट्रिक ऑक्साइड सर्विसेज, एलएलसी और क्लीवलैंड क्लिनिक फाउंडेशन के टॉसिग कैंसर सेंटर के वैज्ञानिक जोसेफ ए. बाउर के नेतृत्व में किया गया।

संशोधित विटामिन B12 यौगिक का हुआ अध्ययन

शोधकर्ताओं ने नाइट्रोसिलकोबालामिन (NO-Cbl) नामक एक संशोधित विटामिन B12 यौगिक का अध्ययन किया, जिसमें नाइट्रिक ऑक्साइड रिलीज करने की क्षमता होती है। इसका उद्देश्य यह समझना था कि क्या यह यौगिक रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार कर सीधे ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर तक पहुंच सकता है।

सफलतापूर्वक रक्त-मस्तिष्क अवरोध को किया पार

परिणामों में पाया गया, कि NO-Cbl विभिन्न कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ एंटी-ट्यूमर प्रभाव दिखाता है और विशेष रूप से मस्तिष्क से जुड़े ट्यूमर में मध्यम संवेदनशीलता उत्पन्न करता है। पशु परीक्षणों में यह भी देखा गया, कि यह यौगिक सफलतापूर्वक रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार कर ट्यूमर ऊतक में चयनात्मक रूप से जमा हो जाता है और लंबे समय तक सक्रिय रहता है।

ट्यूमर कोशिका वृद्धि पर इसका प्रभाव मजबूत

एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था, कि NO-Cbl सामान्य ऊतकों की तुलना में ट्यूमर में अधिक समय तक बना रहता है, जिससे यह सीधे ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट में नाइट्रिक ऑक्साइड पहुंचाने में सक्षम हो सकता है। इसके अलावा, जब इसे टेमोज़ोलोमाइड और TRAIL जैसी मौजूदा उपचार विधियों के साथ मिलाया गया, तो ट्यूमर कोशिका वृद्धि पर इसका प्रभाव और भी मजबूत पाया गया, जिससे सहक्रियात्मक (synergistic) परिणाम सामने आए।

कैंसर सेल सर्वाइवल सिग्नलिंग को कमजोर

शोधकर्ताओं का मानना है, कि NO-Cbl ग्लियोब्लास्टोमा के उन प्रतिरोधी तंत्रों को भी प्रभावित कर सकता है, जो इस कैंसर को इलाज के प्रति कठिन बनाते हैं। इसमें कोशिका मृत्यु को बढ़ावा देना और कैंसर सेल सर्वाइवल सिग्नलिंग को कमजोर करना शामिल है।

अभी हो रहा  प्रारंभिक (पायलट) अध्ययन

हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है, कि यह अभी प्रारंभिक (पायलट) अध्ययन है और इसे नैदानिक उपयोग में लाने से पहले और अधिक विस्तृत शोध की आवश्यकता है। भविष्य के अध्ययन इसकी सुरक्षा, खुराक और प्रभावशीलता को और गहराई से समझने पर केंद्रित होंगे।

ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज में एक नई दिशा

कुल मिलाकर, यह शोध ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज में एक नई दिशा की ओर इशारा करता है, जो रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार कर दवाओं को सीधे ट्यूमर तक पहुंचाने और मौजूदा उपचारों के प्रभाव को बढ़ाने में मदद कर सकता है। (ANI)

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