नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंपनियों और आईटी एक्सपर्ट्स का काम आसान बनाने के साथ ही कई तरह की मुश्किलें भी पैदा कर रहा है।
नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंपनियों और आईटी एक्सपर्ट्स का काम आसान बनाने के साथ ही कई तरह की मुश्किलें भी पैदा कर रहा है। एआई जनरेटेड डीपफेक कंटेंट में हाल में आयी बाढ़, गलत सूचनाओं और भ्रामक सामग्रियों का प्रसार समाज में जहर घोल रहे हैं। इन समस्याओं पर रोकथाम और एआई तकनीक के तेजी से प्रसार और उससे पैदा होने वाली चुनौतियों पर गंभीर चिंतन के लिए नई दिल्ली के भारत मंडपम, में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit 2026) का आयोजन किया जा रहा है।
AI दुरुपयोग रोकने कदम
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, अश्विनी वैष्णव, ने कहा कि भारत दुनियाभर के 30 से अधिक देशों के मंत्रियों के साथ तकनीकी और कानूनी उपायों पर चर्चा कर रहा है, ताकि मीडिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग को रोका जा सके। वैष्णव ने कहा कि गलत सूचना, भ्रामक सामग्री और डीपफेक तकनीक समाज की नींव पर हमला कर रही है। इसके खिलाफ जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, AI मॉडल और सामग्री निर्माता सभी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन उपकरणों का दुरुपयोग रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यह शिखर सम्मेलन एआई द्वारा कंपनियों और आईटी एक्सपर्ट्स के काम को आसान बनाने (जैसे उत्पादकता में वृद्धि) और साथ ही, इससे जुड़ी मुश्किलों (जैसे नौकरी की विस्थापन की चिंता) के बीच संतुलन खोजने के लिए एक वैश्विक संवाद मंच है। अश्विनी वैष्णव ने AI इम्पैक्ट समिट में बोलते हुए कहा कि“विश्वास के बिना नवाचार एक बोझ बन जाता है।”उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार AI-निर्मित सामग्री के लिए कड़े नियम विकसित कर रही है, जिनमें जल-चिह्न (वाटर मार्क) और स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानव सृजनात्मकता की प्रामाणिकता सुरक्षित रहे।
AI सामग्री पर विश्वास व सुरक्षा
उन्होंने यह बातें ‘Rewarding Our Creative Future in the Age of AI’ शीर्षक वाले सत्र के दौरान कहीं, जिसमें चार्ल्स रिव्किन, मोशन पिक्चर एसोसिएशन के चेयरमैन और सीईओ, भी शामिल थे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि“यह परिवार, सामाजिक पहचान और प्रशासनिक संस्थाओं के बीच विश्वास को प्रभावित कर रहा है। नई तकनीक को इस तरह इस्तेमाल करना होगा कि यह विश्वास को बढ़ाए, न कि संस्थाओं को कमजोर करे।” उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार भी विश्वास पर आधारित है और इस विश्वास की रक्षा करना अनिवार्य है। श्री वैष्णव ने यह भी बताया कि डीपफेक और डेटा चोरी जैसी घटनाएं पूरे देश और समाज के लिए गैर-वार्तालापीय रूप से गंभीर हैं। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे AI-निर्मित सामग्री की पहचान और नियंत्रण के लिए प्रभावी प्रणाली विकसित करें। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाना है कि AI द्वारा बनाई गई सामग्री स्पष्ट रूप से लेबल की गई हो और इसमें यह संकेत हो कि यह कृत्रिम रूप से बनाई गई है। यह कदम अवैध, यौन शोषण संबंधी या भ्रामक सामग्री को रोकने के लिए उठाया गया है।
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