वैज्ञानिकों ने एक नई और दिलचस्प खोज की है जिसमें बताया गया है कि मसूड़ों की बीमारी (gum disease) को रोकने के लिए जरूरी नहीं कि मुंह के सभी बैक्टीरिया को मारा जाए।
वाशिंगटन (अमेरिका)। वैज्ञानिकों ने एक नई और दिलचस्प खोज की है जिसमें बताया गया है कि मसूड़ों की बीमारी (gum disease) को रोकने के लिए जरूरी नहीं कि मुंह के सभी बैक्टीरिया को मारा जाए, बल्कि उनके आपसी "कम्युनिकेशन सिस्टम" को रोका जा सकता है। हमारे मुंह में लगभग 700 प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो लगातार एक-दूसरे से केमिकल सिग्नल्स के जरिए "बातचीत" करते रहते हैं। यह प्रक्रिया क्वोरम सेंसिंग (quorum sensing) कहलाती है, जिसमें कुछ बैक्टीरिया N-acyl homoserine lactones (AHLs) नाम के सिग्नल्स का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे अपनी ग्रोथ और व्यवहार को नियंत्रित कर सकें।
हानिकारक सिग्नल रोककर बैक्टीरिया को किया जा सकता है कंट्रोल
शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर इन AHL सिग्नल्स को खास एंजाइम्स (lactonases) की मदद से ब्लॉक कर दिया जाए, तो हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है और अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। यह तरीका इसलिए खास है क्योंकि इसमें अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान नहीं होता, बल्कि केवल हानिकारक बैक्टीरिया की गतिविधि पर असर पड़ता है।
ऑक्सीजन का असर भी बदलता है बैक्टीरिया का व्यवहार
स्टडी में यह भी सामने आया कि मुंह के अलग-अलग हिस्सों में, जैसे मसूड़ों के ऊपर और नीचे, ऑक्सीजन की मात्रा अलग होती है और इसका असर बैक्टीरिया की "बातचीत" और उनके व्यवहार पर पड़ता है। ऑक्सीजन वाले हिस्सों में यह सिग्नल्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जबकि ऑक्सीजन की कमी वाले हिस्सों में ये कभी-कभी बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद कर सकते हैं।
दांतों की प्लाक एक जटिल माइक्रो इकोसिस्टम की तरह
वैज्ञानिकों ने यह भी समझाया कि दांतों की प्लाक (dental plaque) एक तरह का इकोसिस्टम है, जैसे जंगल में अलग-अलग प्रजातियां मिलकर रहती हैं। शुरुआत में Streptococcus और Actinomyces जैसे बैक्टीरिया आते हैं जो सामान्य और फायदेमंद होते हैं, लेकिन समय के साथ Porphyromonas gingivalis जैसे "red complex" बैक्टीरिया जुड़ जाते हैं, जो मसूड़ों की बीमारी से जुड़े होते हैं।
बीमारी रोकने के लिए बैक्टीरिया को खत्म नहीं, बल्कि गाइड करने की सोच
शोध के अनुसार, अगर बैक्टीरिया के इस कम्युनिकेशन नेटवर्क को सही तरीके से कंट्रोल किया जाए, तो प्लाक को हेल्दी स्टेज में बनाए रखा जा सकता है और periodontal disease जैसी गंभीर समस्या को रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे चलकर इस रिसर्च से ऐसे नए इलाज विकसित हो सकते हैं जो सिर्फ बैक्टीरिया को खत्म करने के बजाय उन्हें सही दिशा में "गाइड" करेंगे। इससे न सिर्फ दांत और मसूड़ों की बीमारियां कम होंगी, बल्कि शरीर के अन्य माइक्रोबायोम से जुड़ी बीमारियों के इलाज में भी मदद मिल सकती है।
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