खंडवा के कोविड गंगराडे ने शंघाई WorldSkills प्रतियोगिता में डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिजाइन में सिल्वर मेडल जीता। टीम इंडिया ने प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल किया।
खंडवा (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के खंडवा से ताल्लुक रखने वाले कोविड गंगराडे ने चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। गंगराडे ने ‘डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिजाइन’ कैटेगरी में यह उपलब्धि हासिल की। करीब 70 देशों और क्षेत्रों के 1,400 से ज्यादा युवा प्रतिभागियों वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने 10वां स्थान हासिल किया और छह सिल्वर मेडल के साथ 20 ‘मेडल फॉर एक्सीलेंस’ अपने नाम किए।

खंडवा पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत
इस उपलब्धि के बाद खंडवा लौटने पर गंगराडे का जोरदार स्वागत किया गया। वह टीम इंडिया का हिस्सा थे, जिसने 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल किया और छह सिल्वर मेडल व 20 'मेडल फॉर एक्सीलेंस' जीते। 22 से 27 सितंबर तक चले इस छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में लगभग 70 देशों और क्षेत्रों के 1,400 से ज़्यादा युवा प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया।
एक साल की मेहनत से मिली सफलता
उन्होंने लगभग एक साल की कड़ी ट्रेनिंग और तैयारी के बाद मिली इस उपलब्धि को बेहद गर्व की बात बताया और कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्होंने ग्लोबल प्रतियोगिता में देश के लिए कुछ अहम हासिल किया है। कोविड ने कहा, “वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता हर दो साल में होती है और इस साल इसमें 70 देशों के कुल 1,400 प्रतियोगियों ने अलग-अलग कैटेगरी में हिस्सा लिया। मैंने 'डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिज़ाइन' कैटेगरी में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता है। मेरे लिए यह बहुत गर्व की बात है कि मैंने अपने देश के लिए कुछ हासिल किया है।”
ट्रेनिंग और सपोर्ट के लिए सरकार को दिया श्रेय
उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान ट्रेनिंग और दूसरी सुविधाएं देने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल को श्रेय दिया। गंगराडे ने कहा, “मैं पिछले एक साल से कड़ी मेहनत कर रहा था और मुझे भारत सरकार से ट्रेनिंग और सपोर्ट मिला। MSDE, NSDC और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल ने ट्रेनिंग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने सभी सुविधाएं दीं और आरामदायक यात्रा, रहने की व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित की। इतना सपोर्ट मिलने और आखिर में अच्छा नतीजा मिलने पर बहुत अच्छा लग रहा है।” मुकाबले में भारत के 10वें स्थान पर रहने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह सिर्फ़ रैंकिंग की बात नहीं है, बल्कि देश के युवाओं में स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) के स्तर को भी दिखाता है।
स्किल डेवलपमेंट से बढ़ेगा रोजगार
उन्होंने कहा, "जितना ज्यादा स्किल डेवलपमेंट होगा, उसका सीधा असर रोज़गार पर दिखेगा। यह बहुत अच्छा संकेत है क्योंकि भारत के युवा न सिर्फ़ नौकरी की तलाश करेंगे, बल्कि अपने और दूसरों के लिए रोज़गार भी पैदा कर सकेंगे।" गंगराडे ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सरकार की ओर से मेडल जीतने वालों को जो सम्मान मिल रहा है, उससे और भी युवा स्किल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
2028 वर्ल्डस्किल्स के लिए युवाओं को प्रेरणा
उन्होंने कहा, "जो लोग अगले वर्ल्डस्किल्स 2028 के लिए रजिस्टर करेंगे, उन्हें भी हौसला मिलेगा। वे देखेंगे कि अगर वे जीतते हैं और इस स्तर तक पहुँचते हैं, तो उन्हें भी सम्मान मिलेगा और सरकार उनके साथ खड़ी होगी। हम इस सफ़र में अकेले नहीं हैं। यही बात इसे और भी ज़्यादा मायनेपूर्ण बनाती है।"
खंडवा से गंगराडे का पुराना नाता
मुंबई में पैदा होने और वहीं पले-बढ़े होने के बावजूद, गंगराडे का मध्य प्रदेश के खंडवा से गहरा नाता है, जहाँ उन्होंने अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बचपन की छुट्टियाँ बिताई थीं। उनके दादाजी खंडवा के रहने वाले थे, जबकि उनके मामा और मौसी भी इसी शहर में रहते हैं।
खंडवा को बताया अपना पहला घर
गंगराडे ने कहा, "खंडवा मेरे दादाजी का शहर है और किशोर कुमार का भी शहर है। मैं हर सर्दी और गर्मी की छुट्टियों में अपने माता-पिता के साथ यहाँ आता था। हालाँकि मेरा जन्म मुंबई में हुआ था, लेकिन खंडवा मेरा पहला घर है। मेरी सारी यादें इसी जगह से जुड़ी हैं।" उन्होंने बताया कि उनके दोस्त उन्हें "खंडवा वाला" कहकर बुलाने लगे थे, जो मशहूर गायक किशोर कुमार से जुड़ा एक नाम है, जिनकी पहचान इस शहर से रही है। (Source: ANI)
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