संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के रवैये पर निशाना साधा।
नई दिल्ली: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के रवैये पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए, लेकिन सरकार चर्चा की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन में उचित बहस से परहेज किया। विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा को गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जिसके साथ ही संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया।
12 विधेयक पारित, लेकिन बहस पर सवाल
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि संसद में कुल 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन सरकार चर्चा की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि खासकर लोकसभा में विपक्ष ने उचित बहस नहीं होने दी। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सरकार खुद चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से बचने के लिए अलग-अलग कारण बता रहा था।
‘विपक्ष सरकार से जवाब चाहता है’
रिजिजू ने कहा कि विपक्ष सरकार से जवाब चाहता है और सरकार जवाब देने के लिए बाध्य है। लेकिन संसद के अंदर ऐसा माहौल देखने को मिला, जहां सरकार चर्चा के लिए बुला रही थी और विपक्ष इससे बच रहा था। उन्होंने कहा कि यह संसदीय लोकतंत्र के लिए स्वस्थ स्थिति नहीं है। रिजिजू के मुताबिक, विपक्ष ने यह तक घोषणा कर दी थी कि वह न तो चर्चा सुनेगा और न ही मंत्री का जवाब सुनेगा।
लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा पारित
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए, जबकि एक विधेयक पर चर्चा हुई। वहीं, राज्यसभा में विधेयकों पर पूरी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कुछ अन्य दल सदन से बाहर चले गए, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने चर्चा में हिस्सा लिया। रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर संसद में अपनी भूमिका को नारेबाजी और हंगामे तक सीमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद सार्थक बहस और चर्चाओं में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष मानसून सत्र के दौरान अपने आचरण पर विचार करेगा और शीतकालीन सत्र में संसद की कार्यवाही शुरू होने पर सार्थक बहस और चर्चा सुनिश्चित करेगा।
‘नए सांसदों को सीखने का मौका नहीं मिला’
रिजिजू ने कहा कि उन्हें कांग्रेस के नए सांसदों के लिए दुख होता है, क्योंकि बहस और चर्चा नहीं होने से उन्हें संसदीय कार्यवाही सीखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ सदस्यों पर वह ज्यादा कुछ नहीं कह सकते, लेकिन नए सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा का अवसर मिलना चाहिए था। रिजिजू ने उम्मीद जताई कि शीतकालीन सत्र से पहले गहन चिंतन के बाद विपक्ष के रवैये में बदलाव आएगा।
मकर द्वार पर भी हुआ विरोध प्रदर्शन
संसद परिसर में मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला। गुरुवार को भी संसद परिसर के मकर द्वार की सीढ़ियों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों के बीच तीखी प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
(एएनआई)
यह भी पढ़े: संसद में विपक्ष के विरोध पर कंगना रनौत का हमला, राहुल गांधी पर बहस से बचने का आरोप