औरंगाबाद में जितिया पर्व के विसर्जन के दौरान पुनपुन नदी में डूबने से 13 वर्षीय बालिका की मौत हो गई, जिससे पर्व की खुशियां मातम में बदल गईं।
औरंगाबाद (बिहार)। मां ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रात भर निर्जला जितिया व्रत रखा था, सुबह बेटी जितिया विसर्जन के लिए गई, लेकिन लौट कर नहीं आई। पुनपुन की लहरों ने 13 साल की मासूम हर्षिका को हमेशा के लिए अपनी आगोश में ले लिया। नवीनगर के माली थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के कुलहड़िया गांव में रविवार सुबह जितिया विसर्जन के दौरान हुए हादसे ने पर्व की खुशी को मातम में बदल दिया।
स्नान के दौरान हुआ हादसा
मृतक कुलहड़िया निवासी प्रमोद नोनिया की मंझली बेटी हर्षिका कुमारी है। वह तीन बहनों में मंझली थी, एक इकलौता छोटा भाई है। पिता परदेश में ट्रक चलाते हैं, मां पिंकी देवी ने बेटी की सलामती के लिए जितिया रखा था। रविवार सुबह हर्षिका सहेलियों के साथ रामरेखा-पुनपुन संगम तट पर जितिया डुबोने गई। विसर्जन के बाद तीनों बच्चियां स्नान करने लगीं। तभी अचानक गहरे गड्ढे में पैर चला गया। तीनों डूबने लगीं।
शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंपा
टहल रहे ग्रामीणों ने देखा तो हल्ला मचाया। दो बच्चों को तो लोगों ने बचा लिया, लेकिन हर्षिका को नदी ने नहीं छोड़ा। घंटों खोज के बाद जब उसकी लाश निकली तो मां लिपट कर ऐसी चीखी कि संगम का पानी भी थम गया। माली थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया गया है।
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