सरपंच संघ डोंगरगढ़ के अध्यक्ष और ग्राम पंचायत बोरतलाव के सरपंच कैलाश ऊके के खिलाफ पंचायत के 20 में से 18 पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की है।
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। डोंगरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत बोरतलाव में पंचायत राजनीति गर्मा गई है। सरपंच संघ डोंगरगढ़ के अध्यक्ष और ग्राम पंचायत बोरतलाव के सरपंच कैलाश ऊके के खिलाफ पंचायत के 20 में से 18 पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की है। पंचों ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर एसडीएम को आवेदन सौंपते हुए सरपंच को पद से हटाने की मांग की है।
सरपंच कैलाश ऊके के खिलाफ लामबंद हुए पंच
अब इस पूरे मामले पर क्षेत्र की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी मतदान प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बोरतलाव में पंचायत के अधिकांश निर्वाचित पंचों ने सरपंच कैलाश ऊके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 20 में से 18 पंच ब्लॉक मुख्यालय पहुंचे और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को अविश्वास प्रस्ताव संबंधी आवेदन सौंपा।
मनमानी और विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप
पंचों ने आरोप लगाया है कि पंचायत संचालन में पारदर्शिता की कमी है और महत्वपूर्ण निर्णय बिना उनकी सहमति के लिए जा रहे हैं। पंचों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में पेयजल, सड़क, नाली निर्माण और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की गई है। इसके अलावा पंचायत राज अधिनियम के तहत नियमित रूप से होने वाली मासिक बैठकों का भी पालन नहीं किया गया, जिससे वार्डों की समस्याओं का निराकरण प्रभावित हुआ है।
कुर्सी बचाने के लिए कैलाश ऊके के सामने बड़ी चुनौती
आवेदन के साथ पंचों ने अपने हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज भी प्रशासन को सौंपे हैं। अब प्रशासन द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि तय की जाएगी। पंचायत नियमों के अनुसार सरपंच को अपना पद बचाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना होगा। हालांकि 20 में से 18 पंचों के प्रस्ताव के पक्ष में आने से सरपंच कैलाश ऊके की स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
आगामी वोटिंग तय करेगी बोरतलाव का भविष्य
स्थानीय राजनीति में इस घटनाक्रम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरपंच संघ डोंगरगढ़ के अध्यक्ष होने के कारण कैलाश ऊके पहले भी क्षेत्रीय राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब उनके ही पंचायत क्षेत्र के अधिकांश पंचों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक प्रक्रिया और अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान पर टिकी हुई हैं, जो ग्राम पंचायत बोरतलाव की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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