भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, ऑन-डिवाइस AI और एजेंटिक AI तकनीक के विकास से नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
नई दिल्ली: भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी महत्वाकांक्षाएं और एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को तेजी से अपनाने से देश के प्रौद्योगिकी और दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को नया आकार मिलने वाला है, जिसमें उद्योग जगत के नेता चिप डिजाइन, घरेलू विनिर्माण, स्वायत्त नेटवर्क, उद्यम समाधान और अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी में अवसर देख रहे हैं। मीडियाटेक इंडिया के प्रबंध निदेशक अंकु जैन ने कहा कि एआई-सक्षम उपकरणों की वृद्धि आने वाले वर्षों में एक प्रमुख प्रवृत्ति होगी, क्योंकि उपभोक्ता स्मार्टफोन और लैपटॉप पर कार्यों को सौंपने और परिणाम-आधारित सहायता प्राप्त करने के लिए एआई एजेंटों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। जैन ने कहा, मुझे लगता है कि एक बड़ा रुझान जो मैं देख रहा हूं वह खुद एआई के बारे में है। एआई एक बहुत बड़ा मेगा ट्रेंड है, जिसे हम आगे बढ़ते हुए देखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि डिवाइस तेजी से शक्तिशाली होते जाएंगे और एज पर सीधे बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) को संभालने में सक्षम होंगे।
डिमेंसिटी 9600 प्रो के जरिए ऑन-डिवाइस AI पर जोर
उन्होंने मीडियाटेक के हाल ही में लॉन्च किए गए डिमेंसिटी 9600 प्रो चिपसेट का उदाहरण दिया, जिसमें एक डुअल न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (एनपीयू) है, जो उपकरणों पर एआई प्रोसेसिंग को तेज करने पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है। जैन ने सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 और 2.0 द्वारा उत्पन्न गति का भी स्वागत किया और कहा कि ये पहल एक व्यापक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मदद कर रही हैं।
हालांकि मीडियाटेक एक फैबलेस चिप डिजाइन कंपनी है और खुद सेमीकंडक्टर का निर्माण नहीं करती है, उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण और हाल ही में शुरू की गई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके कंपनी के लिए अप्रत्यक्ष रूप से अवसर पैदा कर सकती है। भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की संभावनाओं पर जैन ने कहा कि अधिक स्वदेशी कारखाने और संयंत्र उभरेंगे, जिससे देश के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को बल मिलेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि उन्नत सेमीकंडक्टर उत्पादन स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा।
एजेंटिक AI से दूरसंचार क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव
उन्होंने कहा, अभी तो मुझे लगता है कि काम पुराने नोड्स पर चल रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि समय के साथ, एक देश के रूप में, हम नवीनतम नोड्स के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम हो जाएंगे। इस बीच एक्सेंचर इंडिया के प्रबंध निदेशक और संचार, मीडिया और प्रौद्योगिकी के प्रमुख बर्जेश चावला ने कहा कि एजेंटिक एआई दूरसंचार उद्योग को कई स्तरों पर बाधित कर सकता है, आंतरिक संचालन से लेकर उद्यम पेशकशों और संप्रभु एआई तक। उन्होंने कहा कि एआई एजेंट नेटवर्क संचालन, आईटी संचालन और ग्राहक सेवा को तेजी से स्वायत्त बना सकते हैं, जबकि दूरसंचार कंपनियां उद्यमों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कनेक्टिविटी के आसपास एकीकृत समाधान बना सकती हैं, जिसमें प्रमाणीकरण और साइबर सुरक्षा शामिल है।
संप्रभु AI और 6G से टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए अवसर
चावला ने यह भी कहा कि संप्रभु एआई स्थानीय डेटा निवास, नियंत्रण और राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रित एआई अनुप्रयोगों के संबंध में अवसर पैदा करेगा। उनके अनुसार, दूरसंचार कंपनियों के पास अपने मौजूदा उद्यम संबंधों, बिलिंग क्षमताओं और बढ़ते डेटा-सेंटर की उपस्थिति को एआई-सक्षम समाधानों के साथ मिलाकर कनेक्टिविटी से आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। आगे की बात करते हुए, चावला ने कहा कि 6जी कनेक्टिविटी को तेजी से व्यापक बना सकता है, जिसमें बेस स्टेशन संचार बुनियादी ढांचे के साथ-साथ संवेदन केंद्रों के रूप में कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को 6जी तकनीक को केवल लागू करने के बजाय उसे परिभाषित करने में भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का निर्धारण करना और मालिकाना प्रणालियों पर निर्भरता से बचने के लिए खुली तकनीकों को बढ़ावा देना शामिल है।
(इनपुट: ANI)
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