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जबलपुर में प्रशासनिक लापरवाही से गेहूं खरीदी...

जबलपुर में प्रशासनिक लापरवाही से गेहूं खरीदी पर संकट, अब 15 अप्रैल की डेडलाइन भी निकली

जबलपुर। जिले के किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। सरकारी गेहूं खरीदी 15 अप्रैल से शुरू...

जबलपुर में प्रशासनिक लापरवाही से गेहूं खरीदी पर संकट अब 15 अप्रैल की डेडलाइन भी निकली

जबलपुर में प्रशासनिक लापरवाही से गेहूं खरीदी पर संकट, अब 15 अप्रैल की डेडलाइन भी निकली |

जबलपुर। जिले के किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। सरकारी गेहूं खरीदी 15 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन प्रशासनिक लचरता और अव्यवस्था के कारण अब तक खरीदी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। उपार्जन केंद्रों (वेयरहाउस) और समितियों के चयन में की गई गलतियों के कारण पूरा सिस्टम चरमरा गया है, जिसका सीधा खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है।

​इसलिए नहीं शुरू हुई खरीदी

​प्रशासन द्वारा वेयरहाउस और केंद्रों के निर्धारण में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। यथा शुभ्रा एग्रो वेयरहाउस को क्लीन चिट मिलने के बावजूद उसे सूची से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर मझगवां समिति से 50 किलोमीटर दूर स्थित 'बघेल वेयरहाउस' को जोड़ा गया है। इतनी अधिक दूरी होने के कारण किसानों के लिए अपनी उपज ले जाना अत्यंत कठिन और महंगा साबित होगा।

​शाहपुरा खरीदी केंद्र को काकुल वेयरहाउस के साथ टैग किया गया है। काकुल वेयरहाउस की भंडारण क्षमता मात्र 1400 मीट्रिक टन है, जबकि वहां वास्तविक आवश्यकता 3000 मीट्रिक टन की है। क्षमता से कम वेयरहाउस आवंटित करने से भंडारण की बड़ी समस्या उत्पन्न होगी। लुहारी केंद्र को 25 किलोमीटर दूर शिफ्ट कर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि कुंदम में पास सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर खाली वेयरहाउस उपलब्ध थे, लेकिन प्रशासन ने उन पर ध्यान न देकर 10 किलोमीटर दूर नया केंद्र बना दिया है।

​किसानों की बढ़ी परेशानी

​समय पर खरीदी शुरू न होने से किसान अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं। रबी सीजन की फसल कटाई के बाद किसान अपनी उपज को लेकर केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। प्रशासन के इन फैसलों ने न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि किसानों की परिवहन लागत और समय की बर्बादी को भी बढ़ा दिया है। प्रशासन की इस कुप्रबंधन नीति के कारण अब यह देखना है कि जबलपुर में गेहूं की खरीदी वास्तव में कब सुचारू रूप से शुरू हो पाती है।

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