भोपाल। मध्यप्रदेश में अब तक स्वतंत्रता-पूर्व (ब्रिटिश कालीन) मॉडल पर दी जा रही पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है।
MP News : भोपाल। मध्यप्रदेश में अब तक स्वतंत्रता-पूर्व (ब्रिटिश कालीन) मॉडल पर दी जा रही पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है। जल्द ही राज्य की अपनी पुलिस प्रशिक्षण नीति लागू की जाएगी। प्रशिक्षण के एडीजी राजा बाबू सिंह के अनुसार, नीति का प्रारूप मंजूरी हेतु डीजीपी को भेज दिया गया है।
आधुनिक पुलिसिंग की जरूरत के हिसाब से नहीं थी नीति
वर्तमान में पुलिस भर्ती व प्रशिक्षण का ढांचा ब्रिटिश पुलिस मैनुअल पर आधारित पुराने पैटर्न पर चलता है, जिसमें समय-समय पर मामूली संशोधन किए जाते रहे हैं। राज्य की अपनी अलग प्रशिक्षण नीति अब तक नहीं थी; विभिन्न राज्यों, अर्द्धसैनिक बलों और राष्ट्रीय एजेंसियों की नीतियों/प्रणालियों से अपनाकर काम किया जाता था, जो आधुनिक पुलिसिंग की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। इसी कारण राज्य की स्वतंत्र एवं समसामयिक प्रशिक्षण नीति बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
कौशल/क्षमता ढांचा (Competency Framework)
आधुनिक कानून-व्यवस्था के लिए ईमानदारी (Integrity), पेशेवर दक्षता (Professionalism) और समुदायों के प्रति सम्मान—ये तीन मूल स्तंभ बताए गए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करते समय दृष्टिकोण (Attitudes), कौशल (Skills) और ज्ञान (Knowledge)—इन तीन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है, ताकि प्रशिक्षण समग्र और प्रभावी हो।
प्रशिक्षण की अहम भूमिका
शक्ति के दुरुपयोग की बढ़ती चिंताओं को लेकर साइबर अपराध और आतंकवाद जैसी उभरती चुनौतियों तक, पुलिसकर्मियों को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नए कौशल सीखने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण सुधारों का उद्देश्य
नैतिक पुलिसिंग को बढ़ावा देना: समुदाय के साथ ईमानदारी, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार; जनविश्वास निर्माण। जवाबदेही और पारदर्शिता: सतत पेशेवर विकास के माध्यम से ऐसे तंत्र बनाना जो अधिकारियों को उनके कार्यों के लिए उत्तरदायी बनाए।
विशेषीकृत कौशल: साइबर क्राइम, आतंकवाद, घरेलू हिंसा आदि हेतु डिजिटल फोरेंसिक, काउंटर-टेररिज्म, महिला व बाल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण। कर्मियों के कल्याण पर ध्यान: पुलिस कार्य की उच्च तनावपूर्ण प्रकृति को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य, वेलनेस कार्यक्रम, तनाव प्रबंधन और बर्नआउट रोकने पर फोकस।
विजन (दृष्टि)
एडीजी प्रशिक्षण राजा बाबू सिंह ने कहा कि लक्ष्य एक ऐसी पुलिस फोर्स विकसित करना है जो पेशेवर रूप से सक्षम, नैतिक रूप से सुदृढ़ और सेवा-उन्मुख हो—जो नागरिकों के प्रति संवेदनशील, समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली तथा न्याय, गरिमा और विधि के शासन के प्रति प्रतिबद्ध हो। यह दृष्टि मध्यप्रदेश की पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं की दीर्घकालिक आकांक्षा को दर्शाती है कि पुलिसिंग को जन-केंद्रित, जवाबदेह और आधुनिक सेवा के रूप में बदला जा सके।
पुलिस प्रशिक्षण में मार्शल आर्ट्स का समावेश
शारीरिक तैयारी, प्रतिक्रिया नियंत्रण, आत्म.रक्षा क्षमता और मानसिक अनुशासन बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण में मार्शल आर्ट्स को शामिल करने का प्रस्ताव है।
मुख्य घटक :
लाठी, कलरीपयट्टू, क्राव मागा, मल्लखंभ जैसी विधाओं को विशेष रूप से आरक्षकों (Constables) और उपनिरीक्षकों (Sub-Inspectors) के नियमित शारीरिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाएगा।
फोकस क्षेत्र :
गैर-घातक आत्मरक्षा व नियंत्रित रोकथाम तकनीकें।
भीड़ नियंत्रण एवं निकट-समर (Close-quarters) परिदृश्य।
फुर्ती, सहनशक्ति और जोखिम स्थितियों में आत्मविश्वास बढ़ाना।
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