आईआईटी गांधीनगर की छात्राओं ने जल संयंत्रों और बिजली ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों से बचाने के लिए एक एआई-आधारित सुरक्षा प्रणाली विकसित की है।
अहमदाबाद: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर की दो स्नातक छात्राओं ने जल शोधन संयंत्रों, बिजली ग्रिड और विनिर्माण इकाइयों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर साइबर हमलों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एक साइबर सुरक्षा प्रणाली विकसित की है।
‘ट्रस्टगेट’ से साइबर हमलों की पहचान
“ट्रस्टगेट” नाम की यह प्रणाली नेटवर्क ट्रैफिक और भौतिक सेंसर से मिले आंकड़ों को मिलाकर हमलों की पहचान करती है, प्रभावित उपकरणों का पता लगाती है और संयंत्र संचालकों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दूसरा पुरस्कार
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ओर से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, छात्राओं ने चीन के शंघाई जिआओ टोंग विश्वविद्यालय में आयोजित इंटेल कप, अंतरराष्ट्रीय स्नातक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन प्रतियोगिता 2026 में दूसरा पुरस्कार जीता। कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की तीसरे वर्ष की छात्रा मिलोनी ठक्कर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा मितवा गोस्वामी ने औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली (आईसीएस) की मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों में मौजूद कमी को दूर करने के लिए यह प्रणाली विकसित की। ठक्कर ने कहा, “ट्रस्टगेट किसी हमले के साइबर और भौतिक दोनों पहलुओं को एक साथ समझकर इस कमी को दूर करता है।”
अमेरिका के साइबर हमले से मिली प्रेरणा
यह परियोजना आंशिक रूप से 2021 में अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित ओल्ड्समार जल शोधन संयंत्र पर हुए साइबर हमले से प्रेरित थी। इस हमले में एक अज्ञात हमलावर ने दूर से नियंत्रण प्रणाली तक पहुंच बनाई थी और सोडियम हाइड्रॉक्साइड का स्तर सुरक्षित मात्रा से करीब 100 गुना बढ़ाने का प्रयास किया था।
स्वचालित सुरक्षा प्रणाली हमले को नहीं पकड़ सकी
स्वचालित सुरक्षा प्रणाली इस हमले का पता नहीं लगा सकी थी। बाद में एक संयंत्र संचालक ने कंप्यूटर माउस को अपने आप चलते देखा और ‘कमांड’ बदल दिया था।
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