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NALSAR मूट कोर्ट के समापन समारोह

लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया मनमानी: जस्टिस उज्ज्वल भुयान

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने कहा कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जो लाखों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करे, वह मूल रूप से मनमानी है।

लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया मनमानी जस्टिस उज्ज्वल भुयान

Justice Ujjal Bhuyan at 19th NALSAR Justice BR Sawhney Memorial Moot Court Competition |

हैदराबाद (तेलंगाना)। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने रविवार को कहा कि कोई भी प्रक्रिया जो लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है और व्यक्तियों को मतदान के अधिकार से वंचित करके उन्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना देती है, वह स्वरूप मनमानी है। 

19वीं एनएएलएसएआर बीआरएस मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन समारोह

हैदराबाद में 19वीं एनएएलएसएआर बीआरएस मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में बोलते हुए न्यायमूर्ति भुयान ने कहा, "यदि कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है, उन्हें अपने ही देश में द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाती है, यानी उन्हें मतदान का अधिकार नहीं देती, तो ऐसी प्रक्रिया सर्वरूप मनमानी है। किसी भी तरह की दलील इसे उचित नहीं ठहरा सकती। यह संविधान के मूल सिद्धांतों पर ही प्रहार करती है।" उनकी यह टिप्पणी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में आई है, जिसमें विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बना रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। 

बिहार में किया गया एसआईआर अभ्यास बरकरार

इससे पहले मई में, सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा बिहार में पहली बार किए गए एसआईआर अभ्यास को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि यह अभ्यास संवैधानिक और कानूनी रूप से मान्य है और इसे केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह मतदाता सूची संशोधन की सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है। सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि एसआईआर अभ्यास को केवल इस आधार पर 'अधिकार क्षेत्र से बाहर' घोषित नहीं किया जा सकता कि यह वैधानिक ढांचे के तहत निर्धारित मतदाता सूचियों के नियमित संशोधन से अलग प्रक्रिया अपनाता है।

नाम हटाने से उस व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में ईसीआई की शक्तियां मतदाता सूचियों में शामिल होने की पात्रता निर्धारित करने तक ही सीमित हैं और नागरिकता की स्थिति का पता लगाने तक विस्तारित नहीं होती हैं। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने से उस व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं हो जाती, क्योंकि नागरिकता का निर्धारण केवल कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है।

(इनपुट: ANI)

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