'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ असली लड़ाई पंजाब से नहीं, बल्कि गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से शुरू होनी चाहिए।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई पंजाब से नहीं, बल्कि गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से शुरू होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की पंजाब में पार्टी के नशा-विरोधी अभियान पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही। केजरीवाल ने एक पोस्ट में कहा, नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई पंजाब से नहीं, बल्कि मुंद्रा बंदरगाह से शुरू होनी चाहिए। अगर आपको पंजाब की जरा भी परवाह है, तो गुजरात से आने वाले नशीले पदार्थों को रोकें।
पंजाब में भाजपा की 'नशा मुक्त यात्रा' शुरू
केजरीवाल की यह टिप्पणी नितिन नबीन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने 18 सितंबर को पठानकोट से भाजपा की 13 दिवसीय 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का शुभारंभ करते हुए कहा था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश लेकर आए हैं कि अभियान की शुरुआत पंजाब की धरती से की जाए। नबीन ने कहा कि भाजपा का अभियान नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति नेटवर्क को बाधित करने, अवैध नशीले पदार्थों के धन से कथित तौर पर अर्जित संपत्तियों को जब्त करने, नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर केंद्रित होगा।
पंजाब में भाजपा की चार नशा-विरोधी यात्राएं शुरू
भाजपा की चार नशा-विरोधी यात्राएं पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी और 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होंगी। इस अभियान ने पंजाब में नशे की समस्या से निपटने की जिम्मेदारी को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक खींचतान को भी जन्म दिया है। AAP ने इस मुद्दे पर भाजपा के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की नशा संकट से निपटने के तरीके की आलोचना की है।
पंजाब में भाजपा की चार नशा-विरोधी यात्राएं शुरू
केजरीवाल की हालिया टिप्पणियों ने ध्यान बंदरगाहों और नशीली दवाओं की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क के माध्यम से नशीले पदार्थों की कथित आवाजाही की ओर मोड़ दिया है, जबकि नबीन का अभियान पंजाब के भीतर तस्करी और पुनर्वास के खिलाफ कार्रवाई पर केंद्रित है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है, जिसमें भाजपा, AAP और कांग्रेस इस समस्या से निपटने की जिम्मेदारी और उपायों पर अलग-अलग रुख अपना रही हैं।
(इनपुट: ANI)
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