औरंगाबाद में सांप के डसने से फेरी लगाने वाले बंशी प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार के इकलौते कमाने वाले की मौत से पत्नी और तीन बच्चों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
औरंगाबाद (बिहार)। पेट की भूख मिटाने के लिए दिनभर फेरी लगाने वाले बंशी प्रसाद अब इस दुनिया में नहीं रहे। मंगलवार को एक सांप के डसने से उनकी जिंदगी इलाज के लिए ले जाए जाने के दौरान रास्ते में ही थम गई। घर के इकलौते कमाने वाले के चले जाने से चिचमी गांव में मातम पसरा है और उनके तीन बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
नींद में सांप ने डसा, चीख सुनकर परिजनों में मचा कोहराम
मूल रूप से पौथु थाना क्षेत्र के ईटार गांव के रहने वाले बंशी प्रसाद पिता स्व. लोहड़ी साव पिछले कुछ समय से जम्होर थाना क्षेत्र के चिचमी गांव में पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे थे। रोज की तरह सोमवार की रात भी वे घर में सोए थे। मंगलवार की सुबह करीब साढ़े 4 बजे नींद में ही उन्हें सांप ने डस लिया। उनकी चीख से जब परिजनों की आंख खुली तो घर में कोहराम मच गया।
अस्पताल में कुछ देर रहे ठीक, हालत बिगड़ने पर हायर सेंटर किया गया रेफर
बिना देर किए परिजन बंशी साव को लेकर सदर अस्पताल औरंगाबाद पहुंचे। वहां दोपहर 12 बजे तक तो सब कुछ ठीक थक था। इस दौरान यू होने सबों से बाते भी की और चाय बिस्किट भी खाया। लेकिन थोड़े देर बाद जहर शरीर में तेजी से फैलने लगा। हालत बिगड़ते देख डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में थमी जिंदगी, बकस बाबा के यहां ले जा रहे थे परिजन
उम्मीद की आखिरी किरण लेकर परिजन उन्हें मदनपुर के वार स्थित प्रसिद्ध बकस बाबा के यहां ले जा रहे थे। बाबा पर अटूट आस्था थी कि शायद वहीं कोई चमत्कार हो जाए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रास्ते में ही बंशी प्रसाद ने दम तोड़ दिया।
कमाने वाले की मौत से परिवार पर संकट, तीन बच्चों के भविष्य पर मंडराया खतरा
जैसे ही मौत की खबर घर पहुंची, कोहराम मच गया। पत्नी बदहवास होकर गिर पड़ी। 22 वर्षीय बेटा संजय जो MA कर लिया है, 20 वर्षीय अजय और 18 वर्षीय बेटी शोभा इंटर में अध्ययनरत सबका रो-रोकर बुरा हाल है। घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। फेरी करके जो दो जून की रोटी आती थी, अब वो भी बंद हो गई।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, ग्रामीणों ने आर्थिक सहायता की मांग की
घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गांव वाले बता रहे हैं कि बंशी बेहद मेहनती और मिलनसार थे। हर किसी की मदद को तैयार रहते थे। परिजनों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि तीनों बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चल सके।
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