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जल्द PET डेट जारी करने की मांग

बिहार पुलिस SI भर्ती: गांधी मैदान में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, फिजिकल परीक्षा की तारीख घोषित करने की मांग

बिहार पुलिस SI भर्ती में देरी और धांधली के आरोपों के खिलाफ गांधी मैदान में सफल अभ्यर्थियों का प्रदर्शन। छात्रों ने फिजिकल टेस्ट की तारीख जल्द घोषित करने की मांग की। पढ़ें पूरी खबर।

बिहार पुलिस si भर्ती गांधी मैदान में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन फिजिकल परीक्षा की तारीख घोषित करने की मांग

BPSSC Bihar SI candidates protesting at Gandhi Maidan |

पटना (बिहार)। बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी के खिलाफ गांधी मैदान में विरोध प्रदर्शन के लिए ला खड़ा किया है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जुटे इन सफल उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया में धांधली और रिश्वतखोरी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे सरकार से फिजिकल टेस्ट (PET) की तारीखें जल्द घोषित करने की मांग की है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जांच जारी रहे, लेकिन इसके नाम पर भर्ती को न लटकाया जाए।

जांच से इनकार नहीं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया न रोकने की अपील

सफल अभ्यर्थियों ने एक स्वर में फिजिकल टेस्ट (PET) की तारीखों के ऐलान की मांग की। उनका कहना है कि अगर धांधली के आरोप हैं तो सरकार उसकी गहन जांच कराए, लेकिन इसे बहाना बनाकर पूरी बहाली प्रक्रिया को बाधित करना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुछ छात्र नेताओं द्वारा लगाए गए रिश्वत और भ्रष्टाचार के दावों पर भी तीखा पलटवार किया। एक अभ्यर्थी ने 25 लाख रुपये घूस देने के आरोपों को बकवास बताते हुए कहा कि इस देरी के कारण पैदा हुए मानसिक और शारीरिक तनाव ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है।

25 लाख रुपये घूस के आरोपों पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

छात्र ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "कई छात्र नेता दावा कर रहे हैं कि हमने यहां तक पहुंचने के लिए 25 लाख रुपये दिए हैं। आप अपने कैमरे से चारों ओर देखिए, क्या इनमें से कोई भी छात्र ऐसा दिखता है जो 25 लाख रुपये दे सकता है? हमने पीटी और मेन्स दोनों पास किए हैं; ऐसा नहीं है कि हमने सिर्फ एक परीक्षा पास की है। हम पिछले तीन महीनों से दिन-रात पसीना और खून बहा रहे हैं।"

तीन महीने की ट्रेनिंग से शरीर पर बढ़ा दबाव, पढ़ाई भी प्रभावित

स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा, "तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद शरीर का हर हिस्सा दर्द से कराहने लगता है। कई छात्र 'शिन स्प्लिंट्स' (पैरों के दर्द) से पीड़ित हैं और मुश्किल से चल पा रहे हैं। अगर हमें और इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया, तो हमारा किताबी ज्ञान शून्य हो जाएगा क्योंकि इस कठिन शारीरिक प्रशिक्षण के दौरान हम पढ़ाई नहीं कर पाए हैं। आप जानते हैं कि जो लोग शारीरिक रूप से खुद को थका देते हैं, उनके लिए मानसिक रूप से ध्यान केंद्रित करना बहुत मुश्किल हो जाता है।"

जांच जारी रखते हुए PET की तारीख घोषित करने की मांग

अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील की है कि वह अपनी जांच जारी रखे, लेकिन इसके एवज में भर्ती को रोका न जाए। छात्र ने कहा, "सरकार से हमारी गुजारिश है कि जांच जारी रखें, लेकिन फिजिकल टेस्ट की तारीख भी घोषित करें। जो भी छात्र कदाचार में शामिल पाया जाए, उसे भविष्य की किसी भी परीक्षा में बैठने से रोक दिया जाए। इसके अलावा, जो लोग 70, 75 या 80 अंक लाने का दावा कर रहे हैं, उनके एडमिट कार्ड लिए जाएं और उनकी ओएमआर (OMR) शीट की जांच की जाए। हम असली उम्मीदवार हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की है; हमें डरने की कोई बात नहीं है।" एक अन्य छात्र ने भी इन्हीं भावनाओं को दोहराते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग करने वालों की मंशा पर ही गंभीर सवाल खड़े किए।

असफल उम्मीदवारों की मंशा पर सवाल

छात्र ने टिप्पणी की, "गहन जांच कराइए। 75-80 अंक लाने का दावा करने वाले उन उम्मीदवारों की ओएमआर शीट निकालिए और सत्यापित कीजिए। जो उम्मीदवार वर्तमान में (परिणामों के खिलाफ) विरोध कर रहे हैं, उन्होंने पीटी पास कर लिया था, लेकिन उन्होंने अपना विरोध तब शुरू किया जब मेन्स में उनका रिजल्ट नहीं आया। अब जब वे मेन्स पास नहीं कर पाए हैं, तो वे चाहते हैं कि मेन्स रद्द हो जाए। इसी तरह, जो पीटी में फेल हो गए, वे चाहते हैं कि पीटी रद्द हो जाए। चीजें इस तरह काम नहीं करती हैं। आयोग मूर्ख नहीं है; हमें इस पर पूरा भरोसा है।"

देरी से बढ़ा तनाव, छात्रों ने बताया मानसिक और शारीरिक दर्द

इस दौरान उम्मीदवार ने सफल अभ्यर्थियों की बिगड़ती मानसिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "पिछले एक हफ्ते से हम बेहद व्यथित और तनावग्रस्त हैं। हमें खाने का मन नहीं करता, हम सो नहीं पाते और हमने दौड़ने का भी मोटिवेशन खो दिया है। हम पिछले तीन महीनों से रोजाना आठ से नौ घंटे मैदान पर बिता रहे हैं। जो लोग वास्तव में ट्रेनिंग कर रहे हैं, केवल वही जानते हैं कि इससे शरीर पर क्या असर पड़ता है।"

BPSSC से सख्ती की अपील, OMR जांच के साथ तय हो PET तारीख

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) से कड़ा रुख अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने अपनी बात खत्म की, "आयोग को इसकी जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि इसके सदस्य सभी पढ़े-लिखे अधिकारी हैं जिन्होंने अपनी योग्यता से यह पद हासिल किए हैं। उम्मीदवारों के एक छोटे से समूह के लिए यह सही नहीं है कि वे जब चाहें परीक्षा रद्द करने की मांग करें। आयोग कोई कठपुतली नहीं है; उसका अपना विवेक और निर्णय है। हमारी ओएमआर शीट निकालें, उनकी जांच करें और हमारे एडमिट कार्ड लें, लेकिन कृपया फिजिकल टेस्ट के लिए कोई एक निश्चित तारीख दें।"

अविनाश कुमार बोले- मेन्स में असफल अभ्यर्थी अब लगा रहे धांधली के आरोप

वहीं, प्रदर्शन में शामिल एक अन्य छात्र अविनाश कुमार ने कहा, "कई छात्र पीटी पास करने के बाद फिजिकल परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, चूंकि वे मेन्स पास नहीं कर पाए, इसलिए अब वे धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं। क्या तब पीटी का पेपर लीक नहीं हुआ था? क्या वह वायरल नहीं हुआ था? जो लोग दावा करते हैं कि असली छात्र पास नहीं हुए - तो क्या हम असली नहीं हैं?"

चयन प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा की सच्चाई

भर्ती की कड़ी प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए अविनाश ने समझाया कि यह प्रक्रिया ही उम्मीदवारों को छांटने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा, "मेन्स देने वाले 35,000 छात्रों में से 25,000 वास्तविक छात्रों को छांट दिया जाना है; केवल 10,000 ही सफल होंगे। कोई भी परीक्षा केवल ज्ञान के बारे में नहीं होती; यह 10% दबाव और किस्मत का भी खेल है। हर बार जीत की गारंटी कोई नहीं दे सकता।"
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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