लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद अब योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें एकबार फिर तेज हो गई हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद अब योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें एकबार फिर तेज हो गई हैं। यूपी में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के साथ ही बीजेपी के कार्यकर्ताओं को समायोजित करने के लिए राज्य के विभिन्न निगमों और आयोगों में भी नियुक्तियां हो सकती हैं। इसके लिए बीजेपी नेतृत्व और संघ के बीच बैठकों का दौर जारी है।
छह मंत्री पद अभी भी खाली
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में अभी छह मंत्रियों के स्थान रिक्त है। योगी कैबिनेट में फिलहाल 54 मंत्री हैं जबकि अधिकतम स्वीकृत संख्या 60 है। इस प्रकार छह विधायकों को लाल बत्ती मिल सकती है। इसे देखते हुए बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व 2027 की चुनावी तैयारी के तहत संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने और जातीय संतुलन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट विस्तार और निगमों में कार्यकर्ताओं को समायोजित करने पर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि अगले हफ्ता दस दिन में इस कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
बैठकों का दौर, नामों पर मंथन
सीएम की मौजूदगी में प्रदेश भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों की कई दौर में बैठकें हो चुकी हैं। निवर्तमान प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। कैबिनेट के लिए अन्य नामों पर कोर कमेटी की बैठक के दौरान मुहर लगने की संभावना जतायी जा रही है। यूपी बीजेपी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक 15 अप्रैल तक मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही निगम और बोर्डों में भाजपा पदाधिकारियों के मनोनयन का काम पूरा करने की टाइमलाइन तय कर दी गई है। जल्द ही दिल्ली में बैठक होने वाली है जिसमें मंत्रिमंडल के विस्तार समेत अन्य पदाधिकारियों के मनोनयन को फाइनल कर दिया जाएगा।
फाइनल बैठक का इंतजार
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल के विस्तार की प्रतीक्षा जल्द ही खत्म होने वाली है। प्रस्तावित फेरबदल का खाका लगभग तैयार है। नाम भी तय हो चुके हैं लेकिन दूसरे प्रदेशों में हो रहे चुनावों में व्यस्त होने के कारण पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर फाइनल बैठक नहीं हो पा रही है।
दावेदारों की हलचल तेज
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज होने पर मंत्री पद के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। उनका दिल्ली दौरा फिर शुरू हो चुका है। वहीं, मौजूदा मंत्रियों के बीच भी हलचल बढ़ गई है। संभावित फेरबदल को लेकर कई मंत्रियों की धड़कनें तेज हो गई हैं क्योंकि विस्तार के साथ प्रदर्शन के आधार पर बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में कटौती या उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिहाज से इस बार कैबिनेट में अहम बदलाव हो सकते हैं।
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