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चंडीगढ़ बॉर्डर पर फिर डटे किसान

चंडीगढ़-पंजाब बॉर्डर पर किसानों का 7 दिवसीय धरना, MSP की कानूनी गारंटी और जल समझौते रद्द करने की मांग तेज

चंडीगढ़-पंजाब बॉर्डर पर किसानों का 7 दिवसीय धरना शुरू। SKM ने MSP की कानूनी गारंटी, जल समझौते रद्द करने, कर्ज माफी और फसल बीमा की मांग तेज की। पढ़ें पूरी खबर।

चंडीगढ़-पंजाब बॉर्डर पर किसानों का 7 दिवसीय धरना msp की कानूनी गारंटी और जल समझौते रद्द करने की मांग तेज

Farmers at a sit-in protest at the Chandigarh-Punjab border |

चंडीगढ़ (पंजाब)। चंडीगढ़-पंजाब बॉर्डर एक बार फिर किसानों के बड़े आंदोलन का गवाह बन रहा है। अपनी लंबित मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने एयरपोर्ट रोड के पास 1 से 7 सितंबर तक चलने वाला सात दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और दशकों पुराने जल समझौतों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

32 किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने का किया फैसला

किसानों के इस बड़े जमावड़े को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े बंदोबस्त किए हैं। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू लखोवाल) के वरिष्ठ नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने स्पष्ट किया है कि 32 किसान संगठनों के इस गठबंधन ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन तेज करने का निर्णायक फैसला लिया है, क्योंकि सरकारें उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रही हैं।

सरकार की अनदेखी से किसानों में नाराजगी

सरकारी तंत्र की उदासीनता पर तीखी नाराजगी जताते हुए किसान नेता लखोवाल ने कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही है। लखोवाल ने कहा, "हम 32 किसान संगठनों के गठबंधन ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि हम लंबे समय से ये मांगें उठा रहे हैं। हमने राज्यपाल, सीएम, एसडीएम और डीसी को ज्ञापन सौंपे हैं; हमने उन्हें कई अधिकारियों को भी सौंपा है। साढ़े चार साल हो गए हैं, फिर भी कोई हमारी नहीं सुन रहा है और हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।"

जल समझौतों पर पंजाब सरकार से विशेष सत्र की मांग

जल अधिकारों के अति-संवेदनशील मुद्दे पर पंजाब सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए किसान नेता ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने आगे कहा, "हमने 2-3 साल पहले भी यही मुद्दे उठाए थे; वे कुछ मांगों पर सहमत हुए लेकिन उन्हें लागू करने में विफल रहे, विशेष रूप से पानी के मुद्दे पर। पंजाब सरकार यह तर्क दे सकती है कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है, कि केंद्र को इसे संभालना है। हम चाहते हैं कि वे एक विशेष सत्र बुलाकर विधानसभा में इसका विरोध करें। उन्हें पिछले जल समझौतों को रद्द करने की मांग करनी चाहिए; आखिरकार, 25 साल बीत चुके हैं।"

FTA के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

इसके साथ ही, किसान यूनियनों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है। कृषि समुदाय की आर्थिक चिंताओं को रखते हुए उन्होंने बताया, "मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर, जिसकी घोषणा कुछ समय पहले की गई थी, हम इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। हर जगह पहले से ही विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं"।

22 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी की मांग

कॉरपोरेट घरानों को मिलने वाली राहत और किसानों की अनदेखी के बीच के भारी अंतर पर सवाल उठाते हुए बीकेयू नेता ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। लखोवाल ने कहा, "केंद्र सरकार की 22 फसलों के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर हम कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। दूसरी बात, कर्ज के संबंध में, अगर लाखों करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट कर्ज माफ किए जा सकते हैं, तो हमारा कर्ज क्यों नहीं माफ हो सकता? हम एक उचित फसल बीमा योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं"।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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