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सनातन भारत का मूल धर्म: सीएम योगी

सीएम योगी बोले- सनातन भारत का मूल धर्म, इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में कहा कि सनातन भारत का मूल धर्म है। उन्होंने अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का भी उल्लेख किया।

सीएम योगी बोले- सनातन भारत का मूल धर्म इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती

CM Yogi Says Sanatan Is India's Core Faith, Nation Cannot Be Imagined Without It |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के विराम सत्र को संबोधित करते हुए सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन भारत का मूल धर्म है और देश की पहचान उसकी धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज की परंपराओं से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया तथा प्रदेश में गोशालाओं के संचालन और गोवंश संरक्षण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज का किया उल्लेख

दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण और व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचानते, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत को समझना संभव नहीं है।

गोमाता में सनातन धर्म की पहचान: योगी

मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पहला ग्रास गोमाता का माना गया है। उनके अनुसार, यदि हर सनातनी इस परंपरा का पालन करता तो गोमाता सड़कों पर नहीं विचरतीं। उन्होंने कहा कि इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि इस परंपरा का पालन किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में लोगों ने अपने ऋषि-मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया।

गोमाता के संरक्षण पर दिया जोर

सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है और धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को भी बचाना होगा। उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है। उन्होंने गोवंश संरक्षण के लिए नागरिकों की सहभागिता पर भी जोर दिया।

निराश्रित गोवंश के लिए 1500 रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार निराश्रित गोवंश को रखने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण-पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। उन्होंने आमजन से गोशालाओं के संचालन में भागीदार बनने और गोवंश को गोद लेने का आह्वान किया।

प्राकृतिक खेती को बताया समाधान

मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से खाद्यान्न प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका समाधान केवल उपचार नहीं, बल्कि भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है।

उन्होंने कहा कि गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग करने से कैंसर, किडनी व लिवर की खराबी और डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होंगी तथा तनाव भी नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने भारतीय नस्ल की गोमाता को गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार बताते हुए गोवंश के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त गरीबों की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड़ रुपये अलग से दिए हैं।

कथा व्यास स्वामी राजेंद्रदास की सराहना

मुख्यमंत्री ने वृंदावन से आए कथा व्यास, मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। सीएम योगी ने कहा कि कथा के दौरान देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जनजीवन को प्रभावित किया, लेकिन गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ की भूमि पर कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। उन्होंने कहा कि आपदा भी कथा के मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है।

संतों और श्रद्धालुओं ने की आरती

कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन और यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से स्वामी रामदिनेशाचार्य और गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ मौजूद रहे। कार्यक्रम में कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु-संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

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