सुप्रीम कोर्ट की वकील नाज़िया खान ने मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। खान ने आरोप लगाया कि ग्रंथ के चुनिंदा अंशों को संदर्भ से अलग कर प्रस्तुत किया गया।
गाजियाबाद: सुप्रीम कोर्ट की वकील नाज़िया खान ने विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति पर की गई टिप्पणी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए खान ने कहा कि कुछ चुनिंदा अंशों को उजागर करके और उन्हें भ्रामक तरीके से प्रस्तुत करके प्राचीन ग्रंथ को अपमानित किया गया है।
'वंदे मातरम' पर गर्व जताते हुए खान ने गांधी पर साधा निशाना
ANI से बात करते हुए खान ने कहा, मैं कलमा और शहादा दोनों का पाठ करती हूं और जब मैं 'वंदे मातरम' गाती हूं, तो मुझे खुद पर बहुत गर्व होता है- भले ही मैं खान हूं। उन्होंने आगे कहा, जिस तरह से उन्होंने एक अध्याय को चुनकर और शब्दों को तोड़-मरोड़ कर मनुस्मृति को बदनाम किया है, उससे एक गलत धारणा बनाने का प्रयास किया गया है। खान ने कहा कि वह सभी के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करती हैं, लेकिन उन्होंने पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत की तस्वीरें दिखाने पर गांधी पर सवाल उठाया।
मनुस्मृति विवाद पर खान ने गांधी से पूछा सवाल
इसके आगे कहा मैं मानती हूं कि सभी को बोलने की आजादी और मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। वह जो चाहे कह रहे थे, लेकिन उन्होंने पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री और आदरणीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें क्यों दिखाईं? उन्होंने मोहन भगवत की तस्वीर क्यों दिखाई? मनुस्मृति पर सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए खान ने आगे कहा, जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है। क्या प्रधानमंत्री ने कभी कहा है कि सभी को मनुस्मृति पढ़नी या उसका पालन करना चाहिए? उन्हें इसका जवाब देना होगा।
राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
इससे पहले, 22 अगस्त को गांधी ने अपने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा था कि महिलाओं को उनके पिता, पति या पुत्रों के साथ संबंधों से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वह किसी की नहीं केवल अपनी होती है। सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने मनुस्मृति का एक उद्धरण उद्धृत किया और कहा, मनुस्मृति कहती है कि बचपन में स्त्री अपने पिता की होती है। यौवन में वह अपने पति की होती है। जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने पुत्रों की होती है। स्त्री को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए।
महिलाओं की पहचान रिश्तों से नहीं, अपनी स्वतंत्रता से हो: गांधी
यह मनुस्मृति का प्रत्यक्ष उद्धरण है, और ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ये शब्द कभी बोले ही नहीं जाने चाहिए थे। उन्होंने आगे कहा, तुम केवल अपनी हो, यह जताते हुए कि स्त्री की पहचान केवल पुत्री, पत्नी या माता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गांधी ने कहा कि महिलाओं को स्वयं को स्वतंत्र रूप से परिभाषित करने का अधिकार है और उन्हें पारिवारिक संबंधों के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति से संबंधित नहीं माना जाना चाहिए।
(इनपुट: ANI)
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