बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने उनके मंदिर जाने और धार्मिक गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए फतवा जारी किया।
नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान का सपोर्ट करते हुए सीनियर कांग्रेस लीडर और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को केदारनाथ मंदिर में उनकी यात्रा की बुराई करने वाले धार्मिक कट्टरपंथियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोई कट्टर हुए बिना भी बहुत आध्यात्मिक हो सकता है। बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान के हाल ही में उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर के दौरे को लेकर एक धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। X पर पोस्ट किए गए एक बयान में हरीश रावत ने उन लोगों पर निशाना साधा जो फतवे जारी कर रहे हैं और उनकी निजी आस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने समाज में धार्मिक कट्टरता के बढ़ते खतरे के बारे में चेतावनी दी।
कट्टर आलोचकों पर साधा निशाना
हरीश रावत ने कहा, "आज मुझे अखबार में एक बयान मिला जो चिंताजनक था, लेकिन ज़रूरी नहीं था। सारा अली खान श्रद्धा के साथ केदारनाथ आती हैं, वह पिछली बार भी आई थीं, इस बार भी आई हैं। वह नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर की पोती हैं और सैफ अली खान की बेटी हैं- उनकी अपनी आस्था है, लेकिन इसके साथ ही वह अपने धर्म को भी मानती हैं, जो उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला है। कट्टर आलोचकों पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने सवाल किया कि ऐसी असहिष्णुता देश को कहां ले जाएगी। "हालांकि, कुछ छोटी सोच वाले लोग हैं जो उनके वहां जाने के खिलाफ फतवे जारी कर रहे हैं। भाई, हमें सोचना चाहिए कि यह कट्टरता हमें, हमारे समाज और हमारे देश को कहां ले जाएगी। भक्त होना एक बात है और कट्टर होना दूसरी बात है। आप नरम रहते हुए भी भक्त हो सकते हैं। औपचारिक रीति-रिवाजों और व्यक्तिगत आस्था के बीच अंतर बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्रद्धा कट्टर सीमाओं से परे है।
धर्म के नाम पर कट्टरता फैलाने वालों पर साधा निशाना
हरीश रावत ने कहा, अपने धर्म का पालन करें, अपनी आस्था के गुणों को बढ़ावा दें, लेकिन अगर किसी को किसी देवता में आस्था है, तो आप उन्हें उस आस्था को रखने से क्यों रोक रहे हैं? मुझे पता है कि इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती है, लेकिन आस्था और मूर्ति पूजा में अंतर है। उन्होंने आगे कहा, कोई अपनी आस्था पर अड़ा हुआ है, किसी पवित्र जगह पर जा रहा है, और शायद वहीं से, वे ध्यान भी कर रहे हैं और अल्लाह को याद भी कर रहे हैं, क्योंकि दुनिया की सारी ज़मीन नारायण की है, सारी ज़मीन अल्लाह की है, सारी ज़मीन भगवान की है, भगवान की है। हरीश रावत ने कहा कि धर्म के दोनों तरफ के मौकापरस्त लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए ऐसी भावनाओं का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज और भारत पहले से ही इस कट्टरता से बहुत परेशान हैं, जब भी मैं ऐसी खबरें पढ़ता हूं, चाहे एक तरफ से हो या दूसरी तरफ से आजकल, दोनों तरफ ऐसे पहलवानों की कोई कमी नहीं है जो सिर्फ खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए समाज को डंक मारते हैं।
सारा अली खान के मंदिर जाने पर फतवा
ये दोनों तरफ हैं- वे हिंदुओं में भी हैं, मुसलमानों में भी हैं, लेकिन वे किसी के भी शुभचिंतक नहीं हैं, न हिंदुओं के और न मुसलमानों के। हरीश रावत ने कहा, वे धर्म या अपनी आस्था के भी शुभचिंतक नहीं हैं। आज सुबह बरेली के मौलवी और ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के नेशनल प्रेसिडेंट मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने एक फतवा जारी किया, जिसमें उनके मंदिर जाने, नमाज़ पढ़ने और रस्मों को इस्लामिक कानून (शरिया) के तहत "नाजायज़" (नजायज़) और "हराम" बताया गया। मौलवी ने एक्ट्रेस से शरिया के उसूलों को तोड़ने के लिए अल्लाह से माफी (तौबा) मांगने को कहा।
मौलाना ने सारा के मंदिर जाने को बताया हराम
उन्होंने ANI से कहा, "मुझे जानकारी मिली है और कई युवा मुसलमानों ने भी मुझसे एक्ट्रेस सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने और नमाज़ पढ़ने के बारे में पूछा है। क्या शरिया के हिसाब से यह जायज़ है और क्या शरिया ऐसे कामों की इजाज़त देता है? इस बारे में मैं इस्लामिक शरिया का नज़रिया और इस मामले पर उसका क्या फैसला है, यह साफ करना चाहूंगा। मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा, किसी भी मुसलमान के लिए, चाहे वह आदमी हो या औरत, किसी दूसरे धर्म में शामिल होना, नमाज़ पढ़ना और धार्मिक रस्में निभाना शरिया के तहत नाजायज़ (नजायज़) माना जाता है। ऐसे कामों की इजाज़त नहीं है। इसलिए, अगर सारा अली खान ने ये काम किए हैं- केदारनाथ मंदिर जाना, नमाज़ पढ़ना और अपनी मर्ज़ी से दुआ मांगना- तो उन्होंने गुनाह किया है- यह काम हराम है।
(इनपुट: ANI)
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