रायबरेली में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में आइसक्रीम के कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। प्रयोगशाला जांच में चार नमूनों में खतरनाक सिंथेटिक रंग और अन्य अशुद्धियां पाए जाने की बात सामने आई है।
रायबरेली: जिले में गर्मी के दिनों में धड़ल्ले से बिकने वाली आइसक्रीम की मिठास अब लोगों की सेहत के लिए जहर बनती जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच रिपोर्ट ने शहरवासियों को चौंका दिया है। विधि विश्लेषक प्रयोगशाला की जांच में आइसक्रीम के छह नमूने 'असुरक्षित' और 'आमनक' पाए गए हैं, जिनमें खतरनाक सिंथेटिक रंगों की पुष्टि हुई है।
जांच में चार आइसक्रीम नमूने मिले असुरक्षित
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा इसी साल विभिन्न तहसीलों और शहरी क्षेत्रों से अलग-अलग तारीखों पर आइसक्रीम के नमूने भरकर जांच के लिए भेजे गए थे। शहर के घंटाघर स्थित सोमेश सावलानी की दुकान से ज्ञानी आइसक्रीम (असुरक्षित), डलमऊ में राजू की दुकान से दुर्गा आइसक्रीम (असुरक्षित), ऊंचाहार में मनीष की दुकान से सैनिक आइसक्रीम (असुरक्षित), सलोन में चंद्रशेखर की दुकान से आइसकैंडी असुरक्षित पाई गई है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नमूनों में तय मानकों से विपरीत खतरनाक सिंथेटिक कलर (कृत्रिम रंग) और अन्य अशुद्धियां पाई गईं। इस तरह के रंग और रसायन बच्चों और बड़ों दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है।
ACJM कोर्ट में मुकदमे की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय, मानिक चंद्र सिंह ने बताया कि सभी संबंधित निर्माताओं और विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इसके साथ ही, इन सभी कारोबारियों के खिलाफ ACJM कोर्ट में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसी छापामार कार्रवाई जारी रहेगी।
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